पसंद करें
3
नापसंद करें

बाबा रे बाबा

उत्तर से दक्षिण तक एक- एक कर बाबाओं की पोल खुल रही है, उनके चारित्रिक दामन पर दाग सामने आ रहे हैं या कहा जाए कि कुछ बाबाओं ने बाबा होने को अविश्वसनीय होने की हद तक ला खड़ा किया है...संसार ही बाजार है और बाजार ही संसार है। संसार या बाजार में किसी भी चीज
 
ज्ञानेश उपाध्याय (gyanesh upadhyay)