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व्यंग्य - लगे रहो बाबा भाई

व्यंग्यलगे रहो बाबा भाईजहॉ जितने अधिक भ्रष्ट अधिकारी और टैक्सचोर, व्यापारी, ठेकेदार पाये जाते हैं वहीं बाबाओं की दुकानें भी बड़ी बड़ी लगती हैं। बडे बाबा ना तो कस्बों में जाना पसंद करते हैं और ना गॉवों में। आखिर क्लाइन्टेल का सवाल है। ग्राहकी ही नहीं होगी
 
वीरेन्द्र जैन
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सत्य साई हैं जादूगर, यह विडियो हमें बताता है

मेरा दोस्त प्रदीप महफिलों की जान है। अगर वह हो तो कोई बोर हो ही नहीं सकता, क्योंकि वह कुछ छोटे-मोटे जादू दिखाना शुरू कर देता है। रूमाल के अंदर से सिक्का गायब कर देना, फिर उसे हवा से निकालना, रस्सी को काटना, फिर उसमें गांठ लगाना और गांठ का गायब हो
 
नीरेंद्र नागर
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बाबाओं के पीछे क्यों !

आजकल बाबाओं के चर्चे अखबारों ,चैनलों और आम आदमी की ज़ुबान पर खूब हो रहे हैं। मैं यह पूछना चाहता हूँ कि बाबाओं ने ऐसा कौन सा अपराध कर दिया है जिसके लिए लोग उनके पीछे लट्ठ ले के पड़े हैं।भई,आज के बाबा हमारे ही समाज के अंग हैं,इसी से निकले हैं और अगर इसी में
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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ढोंगी बाबा , लालची मीडिया और लाचार आदमी

पिछले कुछ दिनों से हमारे सारे समाचार चैनेलों, जिन्हें आज के संदर्भ में News Entertainment Channels कहना उचित होगा, ने भारतीय समाज में फैले ढोंगी बाबाओं के स्टिंग ऑपरेशन किये और साबुन तेल के विज्ञापनों का तडका लगाकर इन समाचारों की जम कर बिक्री की. “सी”
 
SAMVEDANA KE SWAR
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उजड़े-उखड़े लोगों की कहानी : ‘ढोल बजाकर मस्ती से नाचने की बहुत याद आती है‘

जिस प्रकार कोई किसी चिड़िया का घोंसला नष्ट कर देता है, उसे नया घोंसला बनाने में कितनी मु्श्किल होती है। फिर तो हमारा पुराना घर था, जमीन थी। पेड़ों की घनी छांव थी। वहां का ठंडा वातावरण था। हमें वहां से हटा दिया। न कोई मुआवजा मिला, न जमीन। 30 साल बाद भी
 
अफ़लातून
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"बम चिकी बम…बम….बम"

राजीव तनेजा*** "बोल बम चिकी बम चिकी बम…बम….बम" "बम….बम…बम"…. "बम….बम…बम"(सम्वेत स्वर)… "परम पूज्य स्वामी श्री श्री 108 सुकर्मानन्द महराज की जय"…. "जय"…
 
राजीव् तनेजा