एक मूर्तिकार लगातार कई दिनों से जंगल से गुजरने के दौरान एक पेड़ के नीचेपड़े पत्थर पर अपनी थकान मिटाता था. उसे उस पत्थर से जैसे प्यार हो गयाथा सो उसने सोचा की क्यों न इस पत्थर को एक आकार दे दिया जाए जिससे इसका प्रभाव और सम्मान बढ़ जाए, ऐसा विचार करके उसने
सुधीर तिवारी पंचायती राज संस्थायें भारत में लोकतंत्र की मेरूदंड है। निर्वाचित स्थानीय निकायों के लिए विकेन्द्रीकृत, सहभागिय और समग्र नियोजन प्रक्रिया को बढाव़ा देने और उन्हें सार्थक रूप प्रदान करने के लिए पंचायती राजमंत्रालय ने अनेक कदम उठाए हैं।पिछड़ा
महिलाओं और मानवाधिकार पर विशेष समझ के लिए अवश्य पढ़ें. पुस्तक : मानवाधिकार और महिलाएँ लेखिका : डॉ. ममता चंद्रशेखर प्रकाशक : मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी, मूल्य : 65 रु
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नंदन नील्केड़ी की किताब imagining India से अनुवादित अंश हममें से अधिकतर लोग यह सोचकर जीते हैं, जैसे इस धरती पर हमारा अस्तित्व सदा के लिए बना रहेगा। बेरोजगारी, बीमारी और लगातार बूढ़े होते जाने के बार में हम शायद ही सोचते हैं। चेहरों की झुर्रिया, ढीली
जीवन में सब कुछ एक साथ और जल्दी जल्दी करने की इच्छा होती है सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है और हमें लगने लगता है की दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते हैं, उस समय ये बोध कथा याद दिलाती है की अभी ऐसा नहीं है इस कथा को ध्यान से पढ़िए और इससे अपने जीव
लोगों की जीवन शैली बदलने के साथ खानपान की शैली भी बदल रही है। दूध और मीट के रूप में लोगों की प्रोटीन की मांग तेजी से बढ़ रही है। जबकि सूखी घास पलने वाले पशुओं से भारत में दूध और मीट कम मिल पाता है। यहाँ ऐसे पौष्टिक पशुचारे की जरूरत पैदा होती है जिससे
''अलग-अलग व्यक्ति का एक ही सच पर सोचने का तरीका बिल्कुल फर्क व अलग दृष्टि से होता है। इसलिए उनके विचारों के निष्कर्ष का काफी हिस्सा विरोधाभासी होता है।''ब्रम्हांड की संरचना में ज्यादातर दो विपरीत जोडों के संयोजन को देखा जा सकता है। जैसे-जहाँ ज्ञान है
"सरकारों के सामने यक्ष प्रश्न है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक रोजगार के अवसर कैसे पैदा हों, दरअसल जरूरत इसके मूल में जाने कि है, पहले यह तो तय किया जाए कि असल में ये युवा बेरोजगार क्यों है ? समस्या को उठाया है टीकमगढ़ कि अतिरिक्त जिला कार्यक्रम