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ज्यादा प्रतिस्पर्धा से बिगड़ रही है बाजार की सेहत

प्रतिस्पर्धा से न केवल कारोबारियों, बल्कि ग्राहकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जरूरत से ज्यादा प्रतिस्पर्धा से किसी का भला नहीं होता है। लेकिन इस वक्त इसका कोई विकल्प भी नहीं है। बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित यह लेख इसके विभिन्न पहलुओं को उजागर कर
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ग़म की कहानी

ग़म की कहानी से मुझे भी प्यार है ,दिल आंसुओं के मन्च का फ़नकार है।ऐ दिल भरोसा उस सितमगर पे न कर, उसको शहादत ही सदा स्वीकार है।इक झोपडी जब से बनायी है मैंने ,बिलडर की नज़रों मे मेरा सन्सार है ।हम राम की गाथा सुनाते हैं सदा , तेरी ज़ुबां में रावणी अशाआर
 
ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι
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बातों का बाजार

बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो ना थीजैसी अब है तेरी महफिल कभी ऐसी तो ना थी।अहमद फराज के इस मशहूर शेर के पहले मिसरे में ‘मुश्किल’ की जगह ‘आसान’ कर लीजिए, क्योंकि हिंदुस्तान के टेलीकाम बाजार में काल रेट का युद्ध अब बेहद रोमांचक होता जा रहा है। वीडियोकान
 
प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi
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रेग्युलर करियर ऑप्शन बन रहा है शेयर कारोबार

जॉब का ब्यौरा : हफ्ते में पांच दिन ड्यूटी। रोज करीब छह घंटे तक कंप्यूटर से मिल रही सूचना पर फैसला लेना। टेबल पर हाथ पटक कर खुशी और गम जताने के अलावा कोई शारीरिक मेहनत नहीं।   क्वॉलिफिकेशन: ठीकठाक पूंजी हो। हिसाब-किताब रखना अच्छी तरह आए। कंप्यूटर
 
रमेश तिवारी