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बहन फ़िरदौस,"तर्कों से आप लफ़्ज़ों की जंग जीत सकती हैं, सच्चाई तो फिर भी जस की तस रहेगी ना"

बहन फिरदौस, आप जिस डगर पर चल रहीं है वह उस मंजिल की पहली सीढ़ी है जिसे लोगों ने महिला सशक्तिकरण का नाम देकर बेहद लुभावना बना दिया है. जानना चाहती है क्यूँ ? तो आईये मैं बताता हूँ कैसे??? अगर इन सभी सवालों का जवाब है आपके पास तो ज़रूर बताईयेगा? अगर इन
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'चिपलूनकरिज़्म' का लव जिहाद और फ़िरदौस ख़ान की राष्ट्रवादिता: एक सकारात्मक विश्लेषण

बहन फ़िरदौस ने तो क़सम ही खा ली है कि अब चाहे सिर फूटे या माथा, मैं तो वही करूंगी जो गलत ही है'  तो इधर उनका छोटा भाई भी अपनी पूरी ताक़त लगा देगा, बहन की घर वापसी तक वह चैन से नहीं बैठेगा. वो जो सोच रहे है कि वह उन्हें और
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फ़िरदौस ख़ान की राष्ट्रवादिता और चिपलूनकरिज़्म का लव जिहाद: एक सकारात्मक विश्लेषण

पिछले दिनों हिंदी ब्लॉग जगत में बहन फ़िरदौस खूब छाईं रहीं. एक तरफ वह जहाँ मुस्लिम जगत में नारी की दशा के प्रति अपनी चिंता ज़ाहिर कर रहीं थी और उसमें सुधार हेतु गंभीर रूप से प्रयासरत थीं वहीँ कठमुल्लों से निजात दिलाने की भरपूर कोशिश में
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फ़िरदौस जी, आप हिन्दू धर्म अपना लीजिये; हम आपके साथ है!!!

बहन फ़िरदौस, मैं आपका छोटा भाई सलीम ख़ान ! आज आपकी यह पोस्ट पढ़ी जिसमें इस्लाम धर्म छोड़ कर हिन्दू धर्म अपनाने के लिएय परम आर्य जी द्वारा आपको सलाह दिए जाने पर आपका जवाब आया था. जवाब सुन कर ख़ुशी हुई और यह 'कोट' भी पसंद आया "न दैन्यम न