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आधी दुनिया का कच्चा-’चिट्ठा’

तात्कालिक आग्रह पर लिखा गया समसामयिक चर्चा से रचा आलेख. अप्रकाशित रह जाने की वजह से अपने चिट्ठे पर लगा रहा हूँ. महिला दिवस पर कहीं गहरे बनस्थली को याद करते हुए जहाँ आज भी मुझे मेरा पीछे छूटा हुआ माइक्रोकॉस्म दीखता है. ********** “मैं दरवाज़ा थी,