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प्रेरणादायक --- बच्चों की निस्वार्थ सेवा से बची कुत्ते की जान

हमारे मोहल्ले के कुछ बच्चों ने कल वो काम करके दिखाया जिसको करने से पहले नेता, मंत्री मीडिया का सहारा लेते हैं, दस बार सोचते हैं।दोपहर को लगभग एक बजे का समय होगा। घर के पास ही कुत्ते का बच्चा सड़क पर धूप में पड़ा था। घर की गली से निकलने वाले दो-चार लोगों ने
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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बिल्ली, उसके बच्चे और तोषी, कोशी

कल अचानक तोषी ने बताया कि बिल्डिंग की सीढ़ी के कोने पर बिल्ली ने बच्चे दिए हैं। फ़िर कोशी ने भी बताया और कहा, चलो देखने। देखा, पूरे मातृत्व भाव में पगी हुई बिल्ली। चार बच्चे उसने दिए थे। चारो माँ के दूध में मुह घुसाए पड़े थे और माता राम आराम से बेफिक्र
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वे क्षण, जो जीने का सबब बन जाते हैं

इस बार जन्मदिन पर कई सरप्राइज़ मिले...मैंने अपने प्रोफाइल पर जन्मदिन नहीं लिखा है,लिहाज़ा मुझे लगा यहाँ तो किसी को पता नहीं होगा...पर किसी नेक दिल मित्र ने लगता है पाबला जी को खबर कर दी...और उन्होंने 'ब्लॉगर्स जन्मदिन' वाले ब्लॉग पर यह खबर डाल दी और श
 
rashmi ravija
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असमय मासूमियत खोते बच्चे .......आपका क्या कहना है ....??

कल शाम को हम सभी डांस पर आधारित एक रिअलिटी शो देख रहे थे ....आजकल के बच्चों की प्रतिभा देख कर बहुत हैरानी होती है ....पढना लिखना खेल कूद और साथ साथ ही नाच गाने में उनकी प्रवीणता प्रभावित किये बिना नहीं रहती ....तभी एक बहुत ही छोटी मासूम सी बच्ची अपना
 
वाणी गीत
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नाम वे ही रोशन करते हैं

दिल्ली में इन दिनों छोटे बच्चों के मां-बाप अपने बच्चों के ऐडमिशन के चक्कर में घनचक्कर बने हुए हैं। जो छोटे बच्चों के मां-बाप नहीं हैं, उन्हें परमात्मा का आभारी होना चाहिए कि दुर्गति से बच गए।  अब नालायक बच्चों के मां-बाप होने से ज्यादा मुश्किल क
 
आलोक पुराणिक
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ऐसा क्या है, इसे खेलने में जो हमें देखना चाहिए? वह हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं ?

ब चपना, खेलने और पढ़ने का होता है, लेकिन अब तो पढ़ाई का ही बोझा इतना अधिक हो गया है कि नौनिहालों का बचपना ही छिन गया है। पहले की तरह न वह उछल कूद कर पाते हैं और न ही बुआ, चाचा, ताई, बाबा, दादी आदि का सानिध्य पा रहे हैं तभी तो उनका मन बोझिल होता जा रह
 
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
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वक़्त की धूप में बेरंग होता ये मन...

पिछली 'सिवकासी' वाली पोस्ट पर बड़ी इमोशनल प्रतिक्रियाएँ मिलीं. सुखद अनुभूति हुई,जानकर कि इतने लोग हमखयाल हैं. मेरे बेटे को सबने बहुत आर्शीवाद और शुभकामनाएं दीं....सबका शुक्रिया. पर सारे बच्चे ऐसे ही होते हैं--निश्छल,निष्पाप, दूसरों के दुःख में दुखी ह
 
rashmi ravija
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विस्थापन के डर से सहमी हैं जंगल की बेटियाँ/ बाबा मायाराम

घने जंगल के बीच बसे एक गांव की सुमन 12 वीं कक्षा में पढ़ रही है। वह बोरी अभयारण्य के अंदर के काकड़ी गांव की है। पढने के लिए केसला आई है, जो मध्यप्रदेश के हो्शंगाबाद जिले का एक विकासखंड मुख्यालय है। यहां वह एक गर्ल्स शॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही है। लेकि
 
अफ़लातून
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वक़्त की धूप में बेरंग होता ये मन...

पिछली 'सिवकासी' वाली पोस्ट पर बड़ी इमोशनल प्रतिक्रियाएँ मिलीं. सुखद अनुभूति हुई,जानकर कि इतने लोग हमखयाल हैं. मेरे बेटे को सबने बहुत आर्शीवाद और शुभकामनाएं दीं....सबका शुक्रिया. पर सारे बच्चे ऐसे ही होते हैं--निश्छल,निष्पाप, दूसरों के दुःख में दुखी ह
 
rashmi ravija
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उफ़ ये भीगा हुआ अखबार !

कल लखनऊ के सारे अखबार खून से रंगे होंगे। लॉमार्टीनियर स्कूल के बच्चों की वैन सुबह-सुबह रोडवेज की बस से टकरा गई और पूरी सुबह में, शहर में दर्द घुल गया। एक बच्चे की मौत हो गई. कई घायल हुए. अखबार की दुनिया भी अजीब होती है. संवेदनशील होने के लिए कितनी बा
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थोड़ी सी जो पी ली है

थोड़ी सी जो पी ली है चोरी तो नहीं की है ओ 'शीला' ..... ओ ' मनमोहन'... ओ 'अडवानी'.... कोई तो रोको...कोई तो संभालो   हमें बचा लो..... हम लौटना चाहते हैँ...   हिन्दी में बोले तो... अच्छा बच्चा बनने का और... ड्रगस नइई लेना का...... बोले तो बापू