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होलटाईमरी की उलटबांसियां [बकलमखुद-139]

…भूमिगत पार्टी सीपीआईएमएल उस समय अपने ज्यादातर राजनीतिक काम इंडियन पीपुल्स फ्रंट (आईपीएफ) के जरिए करती थी।  आरा शहर में आईपीएफ के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शराब के दो ठेकों के मालिक हैं और पार्टी का पिछला जुझारू संघर्ष एक गुंडे के हमले से उनकी दुकान
 
अजित वडनेरकर
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आरा में वह ‘पहली’ रात [बकलमखुद-138]

…धमकी देने वाले वाले उस रात ठीक १ बजे सचमुच वहाँ आये थे। उन्होंने गेट पर फायरिंग की, दरवाजा तोड़ा और टारगेट की हुई लड़की को बाहर तक खींच लाए। पूरी बिल्डिंग में किसी की हिम्मत नहीं पडी़ कि उनसे पंगा ले। तब ऊपर से हमारे साथी गया जी ने कट्टे से फायर मारा और
 
अजित वडनेरकर
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कहो कटुआप्रेमी, आड़ में क्यों हो?[बकलमखुद-136]

…दोपहर बाद से अखबारों के दफ्तरों में संख्याओं का खेल शुरू हुआ। अयोध्या में मुल्ला मुलायम की चलाई गोलियों से कितने लोग मारे गए। मैंने खुद नहीं देखा, लेकिन बाद में कवि और संपादक वीरेन डंगवाल से उस दिन के किस्से सुने। … चंद्रभूषण हिन्दी के वरिष्ठ पत्रकार
 
अजित वडनेरकर
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आंच पर खदबदाती ज़िंदगी [बकलमखुद-135]

…पार्टी का मैं एक सामान्य कार्यकर्ता था और बहस के ऊंचे मंचों से मेरी कोई वाकफियत नहीं थी। लेकिन मन में यह आग जरूर थी कि जिंदगी अगर एक सपने के लिए होम की जा रही है तो वह कोई घटिया सपना नहीं होना चाहिए। भारत में कम्युनिज्म को रूसी और चीनी सीमाओं के साथ अमल
 
अजित वडनेरकर
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क्या आपने लोहिया को पढ़ा है? [बकलमखुद-1]

…यू ब्लडी स्काउंड्रल्स... यू बर्न्ट अस पुटिंग बर्निंग टायर्स अराउंड अवर नेक्स......यू ट्राइड टु डिमॉलिश अवर रेस......हमारे केश नोच लिए.....नस्लकुशी करनी चाही हमारी .....भाड़ में गया तुम्हारा देश.....ले जाओ अप्णा देश.....हमें नीं रैणा यहां … चंद्रभूषण
 
अजित वडनेरकर
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मंडल-कमंडल की राजनीति [बकलमखुद-132]

 चंद्रभूषण हिन्दी के वरिष्ठ पत्रकार है। इलाहाबाद, पटना और आरा में काम किया। कई जनांदोलनों में शिरकत की और नक्सली कार्यकर्ता भी रहे। ब्लाग जगत में इनका ठिकाना पहलू के नाम से जाना जाता है। इन दिनों दिल्ली में नवभारत टाइम्स से जुड़े हैं।  बकलमखुद
 
अजित वडनेरकर
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दिल्ली के लिए चालान कटा [बकलमखुद-131]

…वह चुनाव हम लोग जीत गए। किसान नेता रामेश्वर प्रसाद भारत के नक्सली आंदोलन के पहले सांसद बन गए। लेकिन इसकी खुशी काउंटिंग हॉल से बाहर निकलते ही काफूर हो गई, जब पता चला कि बिहटा में तीस से ज्यादा पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की निर्मम हत्या कर दी गई है और
 
अजित वडनेरकर
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गुंडे का इंटरव्यू और दंगे की एक शाम

… बाद में पता चला, शेरशाह सूरी की स्मृतियों से जुड़े शहर के कई ऐतिहासिक स्मारक उस दिन की दंगाई आग में स्वाहा हो गए और शहर के सीमावर्ती इलाकों पर नजर गड़ाए लोगों ने मुस्लिम परिवारों के वहां से हटते ही उनपर कब्जा कर लिया। … चंद्रभूषण हिन्दी के वरिष्ठ
 
अजित वडनेरकर
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विद्रोही चेतना और नोस्टेल्जिया[बकलमखुद-128]

… कमांडर ने हमें  कुछ नियम समझाए। पहला यह कि कंठ और जुबान से नहीं, सिर्फ सांसों में बात करें। आपके पास चमकने वाली कोई चीज नहीं होनी चाहिए, जैसे चेन वाली घड़ी, चश्मा, नग वाली अंगूठी वगैरह। जरूरत पड़ने पर झुकने या लेट जाने में आसानी हो, इसके लिए पैंट
 
अजित वडनेरकर
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बिहार शोज़ द वे [बकलमखुद-128]

…हमारे जनाधार पर हमला होने पर जवाब में विरोधी पक्ष पर हमला बोल कर एक और जनसंहार कर देने की लाइन हमारी कभी नहीं  रही। हमारा मानना था कि जवाबी जनसंहार से जनता का राजनीतिकरण नहीं होगा और इससे वर्ग संघर्ष को नहीं बल्कि जाति संघर्ष को बढ़ावा मिलेगा। …
 
अजित वडनेरकर
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जुड़ना ‘जनमत’ से [बकलमखुद-127]

…घरेलू स्त्री का भी पुरुष के श्रम की रचना में बराबर का योगदान होता है, लिहाजा उत्पादन के एवज में पुरुष को मिलने वाली तनख्वाह में से आधा कानूनी तौर पर उसकी पत्नी के पास जाना चाहिए। … चंद्रभूषण हिन्दी के वरिष्ठ पत्रकार है। इलाहाबाद, पटना और आरा में काम
 
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अमिताभ का खेतैखेत भागना[बकलमखुद-126]

…पटकथा का एक हिस्सा हमें गोर्बाचोव के ग्लासनोस्त और पेरेस्त्रोइका में सुनाई पड़ रहा था। इसकी अनुगूंज हमारी पार्टी के भीतर मौजूद थी, लेकिन आम तौर पर हम इसे कुछ खास तवज्जो नहीं देते थे। … चंद्रभूषण हिन्दी के वरिष्ठ पत्रकार है। इलाहाबाद, पटना और आरा में काम
 
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कुछ सवालों के जवाब [बकलमखुद-124]

…चंदूभाई के आत्मीय और मर्मस्पर्शी आत्मकथ्य को हम सब आतुरता से पढ़ रहे हैं। साथियों को लगता होगा कि चंदूभाई ने अब तक कोइ प्रतिक्रिया नहीं दी है। दरअसल उन्होने एक साथ कुछ प्रतिक्रियाओं के जवाब दिए हैं जिन्हें अलग पोस्ट के रूप में ही छापा जा सकता था…
 
अजित वडनेरकर
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विचारधारा की रूमानियत [बकलमखुद-123]

…बाद में कुछ वरिष्ठ साथियों ने बताया कि जिस तरह नेपोलियन ने युद्ध में घोड़े पर ही सो जाने की कला विकसित कर ली थी, वैसे ही नक्सली योद्धाओं ने अपनी भूख और नींद को इस तरह साध लिया है कि आप जान ही नहीं सकते कि वे कितने भूखे हैं और कितने समय से जगे हुए हैं। …
 
अजित वडनेरकर
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लापता खुद की खोज [बकलमखुद-122]

चंद्रभूषण हिन्दी के वरिष्ठ पत्रकार है। इलाहाबाद, पटना और आरा में काम किया। कई जनांदोलनों में शिरकत की और नक्सली कार्यकर्ता भी रहे। ब्लाग जगत में इनका ठिकाना पहलू के नाम से जाना जाता है। सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर बहुआयामी सरोकारों के साथ प्रखरता और
 
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जीने लगे इलाहाबाद में [बकलमखुद-121]

…खटीमा के जंगलों से रूमानियत कि शुरुआत और फिर … चंद्रभूषण हिन्दी के वरिष्ठ पत्रकार है। इलाहाबाद, पटना और आरा में काम किया। कई जनांदोलनों में शिरकत की और नक्सली कार्यकर्ता भी रहे। ब्लाग जगत में इनका ठिकाना पहलू के नाम से जाना जाता है। सामाजिक-राजनीतिक
 
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कुल-पुरोहित से वादविवाद [बकलमखुद-120]

…करना किताबों से दोस्ती और होना मैथमेटिक्स से आशनाई… चंद्रभूषण हिन्दी के वरिष्ठ पत्रकार है। इलाहाबाद, पटना और आरा में काम किया। कई जनांदोलनों में शिरकत की और नक्सली कार्यकर्ता भी रहे। ब्लाग जगत में इनका ठिकाना पहलू के नाम से जाना जाता है।
 
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माई नेमिज चन्द्रभूषण मिश्रा [बकलमखुद-118]

बखानल धीया, डोम घर जइहैं…यानी कलंकिता के भाग्य में डोम का घर- दूसरी कड़ी... चं द्रभूषण हिन्दी के वरिष्ठ पत्रकार है। इलाहाबाद, पटना और आरा में काम किया। कई जनांदोलनों में शिरकत की और नक्सली कार्यकर्ता भी रहे। ब्लाग जगत में इनका ठिकाना पहलू के नाम से ज
 
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चंदूभाई की अनकही [बकलमखुद-117]

चंद्रभूषण उर्फ चंदूभाई की कलम से कुछ अंतरंग बातें- पहली कड़ी... चं द्रभूषण हिन्दी के वरिष्ठ पत्रकार है। इलाहाबाद, पटना और आरा में काम किया। कई जनांदोलनों में शिरकत की और नक्सली कार्यकर्ता भी रहे। ब्लाग जगत में इनका ठिकाना पहलू के नाम से जाना जाता है।
 
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चूजों को लगे पंख [बकलमखुद-113]

पिछली कड़ी- कभी धूप, कभी छाँव [बकलमखुद-112] दिनेशराय द्विवेदी सुपरिचित ब्लागर हैं। इनके दो ब्लाग है तीसरा खम्भा जिसके जरिये ये अपनी व्यस्तता के बीच हमें कानून की जानकारियां सरल तरीके से देते हैं और अनवरत जिसमें समसामयिक घटनाक्रम,  आप-बीती, जग-री
 
अजित वडनेरकर
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कभी धूप, कभी छाँव [बकलमखुद-112]

पिछली कड़ी- घर-शहर की बदलती सूरत [बकलम खुद-111] दिनेशराय द्विवेदी सुपरिचित ब्लागर हैं। इनके दो ब्लाग है तीसरा खम्भा जिसके जरिये ये अपनी व्यस्तता के बीच हमें कानून की जानकारियां सरल तरीके से देते हैं और अनवरत जिसमें समसामयिक घटनाक्रम,  आप-बीती, ज
 
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घर-शहर की बदलती सूरत [बकलम खुद-111]

पिछली कड़ी- आशियाना दर आशियाना [बकलमखुद-110] दिनेशराय द्विवेदी सुपरिचित ब्लागर हैं। इनके दो ब्लाग है तीसरा खम्भा जिसके जरिये ये अपनी व्यस्तता के बीच हमें कानून की जानकारियां सरल तरीके से देते हैं और अनवरत जिसमें समसामयिक घटनाक्रम,  आप-बीती, जग-र
 
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कोर्ट में गुस्से का इजहार [बकलमखुद-108]

पिछली कड़ी- जेके फैक्टरी में छंटनी का मामला [बकलमखुद-107] दिनेशराय द्विवेदी सुपरिचित ब्लागर हैं। इनके दो ब्लाग है तीसरा खम्भा जिसके जरिये ये अपनी व्यस्तता के बीच हमें कानून की जानकारियां सरल तरीके से देते हैं और अनवरत जिसमें समसामयिक घटनाक्रम, 
 
अजित वडनेरकर
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घर-गृहस्थी की फिक्र (बकलमखुद-109)

दिनेशराय द्विवेदी सुपरिचित ब्लागर हैं। इनके दो ब्लाग है तीसरा खम्भा जिसके जरिये ये अपनी व्यस्तता के बीच हमें कानून की जानकारियां सरल तरीके से देते हैं और अनवरत जिसमें समसामयिक घटनाक्रम,  आप-बीती, जग-रीति के दायरे में आने वाली सब बातें बताते चलते
 
अजित वडनेरकर
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आशियाना दर आशियाना [बकलमखुद-110]

पिछली कड़ी- घर-गृहस्थी की फिक्र (बकलमखुद-109) दिनेशराय द्विवेदी सुपरिचित ब्लागर हैं। इनके दो ब्लाग है तीसरा खम्भा जिसके जरिये ये अपनी व्यस्तता के बीच हमें कानून की जानकारियां सरल तरीके से देते हैं और अनवरत जिसमें समसामयिक घटनाक्रम,  आप-बीती, जग-
 
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शुक्रिया साथियों, फिर मिलेंग...[बकलमखुद-83]

ब्लाग दुनिया में एक खास बात पर मैने  गौर किया है। ज्यादातर  ब्लागरों ने अपने प्रोफाइल  पेज पर खुद के बारे में बहुत संक्षिप्त सी जानकारी दे रखी है। इसे देखते हुए मैं सफर पर एक पहल कर रहा हूं। शब्दों के सफर के हम जितने भी नियमित सहयात्री
 
अजित वडनेरकर