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“महाराष्ट्र माझा” आता फेसबुक वर सुध्दा.

महाराष्ट्र माझा ने आपल्या वाचकांशी संवाद वाढवता यावा, वाचकांना आपल्या प्रतिक्रिया लगेच पोहचवता याव्यात या साठी फेसबुक वरती येण्याचा निर्णय घेतला. आता तुम्ही महाराष्ट्र माझा चे फेसबुक फॅनपेज “लाईक” करुन महाराष्ट्र माझाच्या फेसबुक परिवाराचे
 
आशिष कुलकर्णी
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‘अलविदा फेसबुक’ कहना हो तो !

सोशल नेटवर्किंग साइट ‘फेसबुक’ के उपयोक्ताओं का एक देश बन जाए तो जनसंख्या के लिहाज से यह चीन और भारत के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मुल्क होगा। आशय यह कि दुनिया भर में फेसबुक के उपयोक्ताओं की संख्या दिन दोगुनी गति से बढ़ रही है, और
 
पीयूष पाण्डे
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फेसबुक पर रहें सावधान : इसे अवश्‍य पढि़एगा पढ़ने में कोई लापरवाही मत करिएगा (अविनाश वाचस्‍पति)

विश्राम मत करेंरहें सावधान औरसतर्कमत पूछें कोई तर्कबस सावधान रहेंसतर्क रहेंइमेज पर करें क्लिकऔर जान लें जानकारीफेसबुक और आपके कंप्‍यूटर की जानके लिए आ रही है बहुत भयानक महामारीपर इसमें मत बनने दें बीमारीऔर सावधान रहें।इस पोस्‍ट के लिंक कोअपने मित्रों और
 
अविनाश वाचस्पति
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उन्हें आपकी कोई केयर नहीं है जी

उफ एक बुरी खबर उनके लिये जो फेसबुक पर अपने दिल की बात कहकर जी हल्का कर लेने में भरोसा करते हैं। जो ये सोचते हैं कि दिल में उठे भावनाओं के तूफान को शब्दों के लबादे में लिपटाकर दुनिया को बता ही दिया जाय ताकि कुछ लोग जो इस हाले दिल से इत्तेफाक रखते हैं अपनी
 
उमेश पंत
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विनीत और रवीश के बहाने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट और सवाल-जवाब

लगभग तीन साल से सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स से यारी कर रहा हूं। ऑरकुट, फेसबुक और ट्विटर के जरिए इस दुनिया में कदम रखा। उससे पहले ब्लॉगसोर्स और ब्लॉगस्पॉट से जबरदस्त यारी थी। ब्लॉगसोर्स तो चला गया पर गूगल का ब्लॉगस्पॉट जिंदगी का एक हिस्सा बन गया। इसी बीच
 
गिरीन्द्र नाथ झा
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यहां भारतीयों की एंट्री बैन है!

शुक्रवार देर रात मेरे दोस्त रमित (बदला हुआ नाम) ने मुझे फोन किया। वह काफी उत्तेजित लग रहा था। उसने कहा , ' जानते हो हागेन डाज़ का आउटलेट दिल्ली में खुल गया है। ’ मैंने मज़ाक में कहा , ' बढ़िया है , अब तुम एक आइस्क्रीम पर पहले के मुकाबले कई गुना ज्याद
 
राजेश कालरा
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आने वाला समय मुफ़्त का है

2006 की बेस्ट सेलर द लोंग टैल के लेखक, वायर्ड पत्रिका के सम्पादक क्रिस एंडरसन की स्थापना है कि हमारी अर्थव्यवस्था की नियति है मुफ़्त, यानि फ्री. अपनी सद्य प्रकाशित किताब फ्री: द फ्यूचर ऑफ अ रेडिकल प्राइस के शुरू में ही वे लिखते हैं कि देर-सबेर हर कंपनी को
 
डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल
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फेसबुक की दोस्ती में आखिर रखा क्या है ?

फेसबुक के मामले में बात करते हुए देश के एक मशहूर टेलीविजन पत्रकार ने मुझसे कहा- मेरे ट्रेनी और इन्टर्न माइ फ्रैंड में करन जोहर को दोस्त बनाए हुए हैं। अब मैं ही उनसे महीने-दो महीने में बात करता हूं तो तुम सोचो कि करन जोहर से उसकी कितनी बात होती होगी..
 
विनीत कुमार