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जंगलों में जीवन तलाशता वो

इन टू द वाईल्ड.....और एक दिन वो सब कुछ छोड़ कर चला जाता है। कहीं दूर अलास्का के जंगलों की तरफ। अपने मां बाप और बहन को छोड़कर। बिना कुछ बताये। क्यों। इसके लिये उसके पास कई कारण हैं। वो अपने मां बाप को बचपन से देख रहा है छोटी छोटी बातों पर लड़ते हुए। वो
 
उमेश पंत
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जरूरत है, अच्छी फिल्में

दिल्ली में असम का मशहूर कोहिनूर मोबाइल थिएटर अपनी प्रस्तुति देने आया है। फिल्म, थिएटर से जुड़े और दूरदर्शन पर आने वाला लोकप्रिय धारावाहिक जासूस विजय में मुख्य किरदार में दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाने वाले आदिल हुसैन से फिल्म, नाटक और उत्तर-पूर्व में
 
अभिनव उपाध्याय
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लव.. सेक्स.. धोखा. और सच

लव, सेक्स और धोखा। इन तीनों में से कोई भी शब्द हाईपोथैटिकल और नया नहीं है। तीनों इन्सानी फितरत के हिस्से हैं। और इसी तरह हिन्दुस्तानी फिल्मों के भी। लेकिन दिबाकर बनर्जी जिस तरीके से इन तीनों को स्क्रीन पे दिखाते हैं उससे फिल्म की ग्रामर को ही एक नई धारा
 
उमेश पंत
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ब्लागिंग का जुनून फिल्मों के जुनून पर भारी

आज हम पर ब्लागिंग का ऐसा जुनून चढ़ा है कि हमें लगता है कि हमें जो बरसों पहले फिल्में देखने का जुनून था उस पर भी यह भारी पड़ रहा है। आज हालत यह है कि जब से ब्लाग जगत में कदम रखा है तब से फिल्में देखने का मौका ही नहीं मिल पा रहा है। वैसे ब्लाग बिरादरी
 
राजकुमार ग्वालानी
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मैन विद मूवी कैमरा कैमरा जब आंख बन जाता है

फिल्मों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए मैन विद मूवी कैमरा एक कमाल की फिल्म है। जिस दौर में सिनेमा की षुरुआत होती है उस दौर में कैसे एक डाईरैक्ट हर सम्भव तकनीक अपनी फिल्म में प्रयोग कर लेता है और पूरी सफलता से, ये बात फिल्म देख लेने के बाद ही पता चलती
 
उमेश पंत