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यहाँ ऐसी ही फिल्म चलेगी..

फिल्म कलाकार भइया लाल हेड़ाऊ से बातचीत ‘‘छत्तीसगढ़ी फिल्में बननी चाहिए। इससे प्रदेश की भाषा समृद्ध होगी, वहीं संस्कृति को पर्दे पर जगह मिलेगी, लेकिन फिल्म बनाने का मतलब यह नहीं कि छत्तीसगढ़िया दर्शकों को कुछ भी परोस दो और वे उसे स्वीकार कर लेंगे। कम से कम
 
छत्तीसगढ़ पोस्ट
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रास आयी 'राजनीति'

एक वैरागी जिसने खेल के सारे नियम बदल डाले। वाकई राजनीति ऐसी ही रही। फिल्म की कहानी काफी कसी हुई लगी। शुरू से लेकर जब तक सूरज अपनी मां से नहीं मिलता तब तक आपको यह फिल्म इस कदर बांधे रहती है कि आप अंदाजा नहीं लगा सकते, फिल्म का सवा दो घंटा कैसे गुजर गया।
 
चन्दन कुमार
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मौसम बड़ा बेइमान है (व्यंग्य/कार्टून)

लीजिये साहब बरसात आ गई । अब की बार वक्त पर आ गई । अखबार वाले कह रहे थे कि पिछली बार तो बेवक्त भी नहीं आई थी । आनी भी चाहिये अगर सर्दी, बसंत और गर्मी, ठीक वक्त पर आ सकते हैं तो बरसात को भी टाईम का पाबंद होना चाहिये । पाबंदी जरूरी [...]
 
K M Mishra
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मोरा पिया मोसे बोलत नाही.. 2 और राजनीति फिल्म

उमंग के आने से नफा यह हुआ कि आज वर्षों बाद किसी फिल्म का ‘फर्स्ट डे फर्स्ट शो’ देखा. राजनीति. मनोज वाजपेई रॉक्स!! गज़ब का अभिनय किया है. इस फिल्म मे मनोज का पार्ट दरअसल ड्रामा के विद्यार्थियों के लिये कोचिंग सरीखा है. सम्वाद अदायगी का उत्कृष्ट नमूना पेश
 
चन्दन
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मोरा पिया मोसे बोलत नाही.. 2 और राजनीति फिल्म

उमंग के आने से नफा यह हुआ कि आज वर्षों बाद किसी फिल्म का ‘फर्स्ट डे फर्स्ट शो’ देखा. राजनीति. मनोज वाजपेई रॉक्स!! गज़ब का अभिनय किया है. इस फिल्म मे मनोज का पार्ट दरअसल ड्रामा के विद्यार्थियों के लिये कोचिंग सरीखा है. सम्वाद अदायगी का उत्कृष्ट नमूना पेश
 
चन्दन
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दीया मिर्जा फिर हुई नाकाम?

इसमें कोई शक नहीं कि बाॅलीवुड की कुछ बहुत खूबसूरत एक्टेªसों में दीया मिर्जा का नाम शुमार किया जाता है और अपनी इसी खूबसूरती केContinue Reading »
 
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मैं सबके साथ काम करना चाहती हूं :कैटरीना कैफ

कैट बालीवुड की नई लक्स सुंदरी बन गई हैं। कैट अब कई दशकों तक ब्यूटी सोप के विज्ञापन करने वाली अभिनेत्रियों मधुबालाए हेमा मालिनीए श्री देवीए जूही चावलाए माधुरी दीक्षितए करीना कपूर एवं ऐश्वर्या राय की फेहरिस्त में शामिल हो गई हैं। इस संबंध में कैट कहती हैं
 
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काइट्स

क्या आप कोई एक एेसा कारण बता सकते हैं जिसकी वजह से आप काइट्स देखने जाना चाहते हैं। हां, आपको बता दूं कि रितिक रोशन और बारबरा मोरी के बीच फिल्माए गए कुछ अंतरंग दृश्य सिर्फ अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को ही देखने को मिलेंगे। क्योंकि उन दृश्यों को केवल
 
pankaj mishra
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एक लाइफ स्टाईल है ‘गुरांवट’

चीला, फुगड़ी और हरेली के साथ मनोरंजनमनोरंजन के साथ छत्तीसगढ़ के जीवन और दर्शन को देखना हो तो फिल्म ‘गुरांवट’ देखी जा सकती है। दर्शकों को आकर्षित करने के लिए न कोई बनावटी वेशभूषा न संवाद में लाग-लपेट। ‘चीला रोटी’ से लेकर ‘फुगड़ी’ तक और ‘हरेली’ से लेकर
 
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‘मया दे दे मयारू’ के गीत अब बाज़ार में.

म्यूजिक और मस्ती भरे कार्यक्रम में हुआ विमोचन एएसपी शशिमोहन सिंह अभिनीत छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘मया दे दे मयारू’ के आडियो सीडी का रविवार को पुलिस अधिकारी लाल उमेंद सिंह और प्रशांत ठाकुर के हाथों विमोचन हुआ। इस मौके पर छत्तीसगढ़ी सिनेमा से जुड़ी तमाम हस्तियां
 
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‘गुरांवट’ ने दी उम्मीदें

चकोर की पहली फिल्म सिनेमाघरों में ‘गुरांवट’ के प्रदर्शन के पहले दिन जुटी अपार भीड़ ने न केवल उसमें काम करने वाले कलाकारों को उम्मीदें दी हैं, अपितु निर्माता को भी इस बात का भरोसा दिया है कि पूरी तरह छत्तीसगढ़िहा संस्कृति पर आधारित फिल्म को भी लोग पसंद करते
 
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एक्शन और लवस्टोरी है ‘टूरा रिक्शा वाला’

4 जून को एक साथ प्रदेश के छ: सिनेमाघरों मेंसतीश जैन निर्देशित अगली फिल्म टूरा रिक्शा वाला एक्शन और लवस्टोरी पर आधारित है। जिसमें ऐसी अनेक चीजों को शामिल करने का प्रयास किया गया है कि दर्शक प्रत्येक मिनट मनोरंजक हो। 4 जून को यह फिल्म प्रदेश के 6
 
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कामेडी और मसालेदार होगी ‘मया दे दे मयारू’

छत्तीसगढ़ी सिनेमा में एक और धमाका‘मया दे दे मयारू’ एक ऐसी मल्टीस्टारर फिल्म है, जिसमें हंसी-मजाक, सामाजिक चिंतन, संस्कृति के साथ स्वस्थ मनोरंजन के लिए सारे जरूरी तत्व रखे गए हैं। अभी के दौर में आ रही सभी फिल्मों से इसका टेस्ट काफी अलग है। यह कहना है फिल्म
 
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मेरे पिया गये रंगून....लुंगी कौन पहनता है बे......नवाबिन से पूछो.... मूर्ति बनवा दूँ......क्या बकता है ..लछमी दासिन....सतीश पंचम

एक कोलाज :  फिल्म और साहित्यलोग अब जहर बोते हैं बाबू...... मेरे पिया गये रंगून..... किया है टेलीफून..... तुम्हारी याद .......मोबाईल की अम्मा......अब कौन लुंगी में घूमता है रे.......पैंट पहन कर चलने में नवाबी फटकती है.....चप्पल फटकारते हुए
 
सतीश पंचम
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‘टूरा रिक्शा वाला’ का आडियो लांच

प्रकाश अवस्थी की बहुचर्चित फिल्मफिल्म, मीडिया और राजनीति के नामचीन लोगों की मौजूदगी में नई छत्तीसगढ़ी फिल्म टूरा रिक्शावाला के आडियो का विमोचन सोमवार को हुआ। महापौर किरणमयी नायक और छत्तीसगढ़ चैंबर आॅफ कामर्स के अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी खासतौर पर इस
 
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बॉलीवुड की जुलिया रॉबर्ट्स

प्रीति जिंटा की तारीफों में आजकल उलझा हुआ हूँ। इसलिए बातें उनकी खूबसूरती की ही करूँगा। उनकी आँखें, जुल्फों और डिंपल वाली मुल्कान की तारीफ की जा सकती है। पर वह पारंपरिक तारीफ की श्रेणी में आएगा। कुछ इस तरह जैसे, हिंदी साहित्य के रीति काल में मंझन और जायसी
 
चन्दन कुमार
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प्रीति जिंटा : बॉलीवुड की जुलिया रॉबर्ट्स

अद्भुत, अदम्य और साहस। प्रीति जिंटा। जी हां, कई महीनों से सोच रहा था कि प्रीति जिंटा के बारे में लिखूं। पर बहुत असमंजस में था। आखिर शुरुआत कहां से करूं। क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि सिर्फ लिखने के लिए लिखूं। किसी से तुलना भी नहीं करना चाहता था। हालांकि
 
चन्दन कुमार
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रे की कहानी को परदे पर उतारेंगे संदीप

बांग्ला सिनेमा को एक नई पहचान दिलाने वाले स्व. फिल्मकार सत्यजित रे की मशहूर फेलूदा सीरिज़ की अगली कड़ी जल्दी ही परदे पर नजर आएगी. इस महान फिल्मकार के पुत्र संदीप रे, जो खुद भी जाने-माने निर्देशक हैं, ने अपने पिता की जयंती के मौके पर यह एलान किया है.
 
प्रभाकर मणि तिवारी
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हादसे में बाल-बाल बचे सुंदरानी

एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्माता मोहन सुंदरानी कार-दुर्घटना में बाल बाल बचे हैं। कार क्षतिग्रस्त हो गई है, वहीं साथ में सवार उनकी श्रीमती सुंदरानी को मामूली चोटें आईं हैं।घटना राजनांदगांव के रायपुर नाका के पास की है।
 
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लिखने-पढ़ने का मन नहीं

आज-कल न लिखने का मन कर रहा है, न पढ़ने का। बस, यूं ही फांके मस्ती का मन कर रहा है। और कोई काम जबरदस्ती नहीं होता मुझसे। दिल और दिमाग में सामंजस्य ने बैठे तो क्या फायदा। ब्लॉग पर पहले लिखने के बारे में सोचा, फिर अचानक लगा कि लिखा नहीं जाएगा। तो सोचा, कुछ
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हास्य कलाकार जो सिर्फ पहली अप्रैल को ही नहीं..पूरे साल,हमें हंसाते हैं

यह पोस्ट कल डालने की सोची थी, कल हंसने हंसाने का दिन था. तो सोचा क्यूँ ना अपने प्रिय फिल्म कलाकारों वाली पोस्ट डाल दूँ,जो बरसों से बिना अप्रैल,या दिसंबर देखे हमें हंसाते आए हैं.पर कुछ दिन काफी व्यस्तता भरे थे और देर रात वक़्त मिला तो कहानी की अगली किस्त
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आर्थिक और बौद्धिक विकास के साथ बढ़ता अपराध-हिन्दी लेख (devlopment and crime-hindi article)

क्या गजब समय है। पहले लूट की खबरें अखबारों में पढ़ते थे। फिर टीवी चैनलों पर यह लुटने वाले लोगों के और कभी कभी लुटेरों के बयान सुनते और देखते थे। अब तो लूट के दृश्य बिल्कुल रिकार्डेड देखने को मिलने लगे हैं जो लूट के स्थान पर लगे कैमरों में समा जाते
 
दीपक भारतदीप
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फ़िल्मी सितारे : उनकी आस्था और विश्वास..

कलियुग में भगवान होने कि परिभाषा बदल गयी है। राजा होने के मायने बदल चुके हैं। आज भगवान वो है जिसके भाषण से राशन मिले न मिले लेकिन सोसाइटी में सत्संगी होने कि इमेज से ही लोग खुद को धन्य समझते हैं। राजा होने का अर्थ सही मायने में सरकारी गाड़ियों का काफिला,
 
Season..
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'जब वी मेट' के निर्देशक 'इम्तियाज़ अली' एक फिल्म और बना सकते हैं 'जब वी फेल'

'जब वी मेट' के पहले भी इम्तियाज़ अली ने एक फिल्म बनायी थी ,'सोचा ना था' यह सुपर हिट तो नहीं हुई पर कई लोगों के फेवरेट फिल्म की फेहरिस्त में शामिल है.(मेरे भी ) बॉलीवुड का रुख करने से पहले, 'इम्तियाज़ अली' सात साल तक टेलिविज़न से जुड़े रहें. जी.टी.वी. के
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चालीस साल बाद बडे परदे पर आराधना देखते हुए लोग अपने मोबाईल कैमरे से इन लम्हों को क्या कैद करते……लम्हों ने इन लोगों को खुद ब खुद कैद कर लिया....सतीश

     हाल ही में 1969 की फिल्म आराधना देखने मुंबई के रीगल सिनेमा हॉल में गया था। नॉस्टॉल्जिया पूरे शबाब पर था।आखिर चालीस साल बाद फिर वही फिल्म बडे पर्दे पर जो थी। रेडियो मिर्ची ने यह शो आयोजित किया था पुरानी जीन्स कार्यक्रम के तहत। आर
 
सतीश पंचम
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ग़ैरज़रूरी मुद्दे बनते जा रहे हैं ज़रूरी! ये कैसी राजनीति?

करीब १० दिनों से बस एक ही मुद्दा छाया हुआ है मुंबई में और वो है 'माय नेम इज़ ख़ान' का विरोध... पता नहीं कुछ पार्टियां अपनी कैसी मानसिकता और राजनीति का परिचय दे रही है... देश में इतने ज़रूरी मुद्दे हैं... लेकिन घमासान एक ग़ैर ज़रूरी बयान को लेकर मचा हुआ
 
प्रज्ञा
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थ्री ईडियट्स जैसी फिल्म का विरोध किसने किया था

[मुम्बई में थ्री ईडियट्स के पोस्टर फाड़ते भाजपा कार्यकर्ता अपने झन्डों के साथ]थ्री ईडियटस- जैसी एक बहु प्रशंसित फिल्म के विरोधी कौन थे?वीरेन्द्र जैनथ्री ईडियट्स आमिर खान की बेहतरीन फिल्मों की श्रंखला में एक मील का पत्थर साबित हुयी है जिसने भरपूर मनोरंजन
 
वीरेन्द्र जैन
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पा के बहाने

एक लंबे समय बाद मैं सिनेमा हॉल की तरफ लौटा हूं। सिनेमा हॉल में मेरे लौटने का कारण रही फिल्म पा। पा के सिनेमा तक आने से पहले ही पत्नी का आदेश था कि इस फिल्म को हमें सिर्फ सिनेमा हॉल में ही बैठकर देखना है। घर में बैठकर डी वी डी पर नहीं। दरअसल, यह बात सच है
 
अंशुमाली रस्तोगी
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क्या अमिताभ बच्चन किसी अपराधबोध के शिकार हैं?

क्या अमिताभ बच्चन किसी अपराध बोध के शिकार हैं? वीरेन्द्र जैन अमिताभ बच्चन ने गुजरात पर्यटन के विकास हेतु मोदी सरकार का ब्रांड एम्बेसडर बनना स्वीकार कर लिया है। इससे पूर्व वे अपनी फिल्म पा के प्रमोशन के लिये मोदी से मिले थे और उनके गले लग कर उनकी प्रशंसा
 
वीरेन्द्र जैन
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बंधना की वेबसाईट लांच

रायपुर के प्रेस क्लब में शुक्रवार को छत्तीसगढ़ी फिल्म बंधना की वेबसाइट का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर ‘बंधना’ के निर्माता संतोष जैन, निर्देशक अमित जैन, वीडियो वर्ल्ड के संचालक मोहन सुंदरानी, अभिनेता करणखान और अभिनेत्री रीमा सिंह समेत अनेक कलाकार मौजूद
 
छत्तीसगढ़ पोस्ट
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यह रहमान का सर्वश्रेष्ठ है क्या

बात उन दिनों की है जब मैं कक्षा आठ में पढता था। एक गाना आया था मुक्काला, मुकाबला ओ लैला...ण क्या था इन गाने में नहीं जानता। सच कहूं तो तब तक संगीत क्या होता है इस बारे में भी कुछ नहीं जानता था। पता तो ये भी नहीं था कि इसका संगीत किसने दिया है, पर गाने को
 
pankaj mishra
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डुबकी लगाना भी एक कला है। थोडा पाप, थोडा पुण्य और ढेरों अहमक बातें....

      कुंभ के समय डुबकी लगाना भी एक कला है। यकीं न हो तो एक बार आप भी हो आओ कुंभ। समझ जाएंगे कि आखिर यह कला क्यों हैं।  कोई  कुलांचे मारते हुए डुबकी लगाता है, तो कोई खडे खडे तो कभी उ हू हू कर ठंड में सिकुडते हुए।
 
सतीश पंचम
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नए साल का संकल्प

नए साल की आप सभी को बहुत सारी शुभकामनाएं। मैं कभी दिल्ली,कभी मुंबई,कभी महाबलेश्वर और कभी हैदराबाद में कुछ शूटिंग तो कुछ दूसरे कामों मेंम व्यस्त रहा, इसलिए एक तारीख को ब्लॉग पर पोस्ट नहीं लिख पाया। दिल्ली की ठंड बर्दाश्त के बाहर थी। लेकिन, इस बात का सुकून
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फिल्म और राजनीति में सरोकार का धंधा

चंदेरी के बुनकरों का सवाल आमिर खान जब ‘थ्री इडियट्स’ के प्रचार के दौरान उठा रहे रहे थे, उस वक्त लोकसभा में मंहगाई को लेकर सांसद हंसते-मुस्कुराते चर्चा करते हुये चर्चा से बचना चाह रहे थे । आमिर खान सामाजिक सरोकार को प्रचार का हथकंडा बनाकर अपने धंधे में
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धांसू पिच्चर और आंवले की चटनी

एकदम झिंटाक पिच्चर है ' थ्री इडियट्स'। सच्ची बोल रहा हूं , रिव्यू पढ़कर फंडे नहीं दे रहा। कल देखकर आया रात 11 बजे वाला शो। ज़िंदगी में पहली बार रेलगाड़ी जित्ती लंबी लाइन लगी थी प्रिया सिनेमा के सामने। खैर, अंदर पहुंचे तो पहली राहत मिली रित्तिक रौशन क
 
सौरभ द्विवेदी
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थ्री इडियट्स --आल इज वैल, आल इज वैल।

सारे टी वी चैनल सारे दिन थ्री इडियट्स दिखाते रहे । जी नहीं , आमिर खान वाली फिल्म नहीं , मैं बात कर रहा हूँ दिल्ली के कोटला मैदान की पिच के क्युरेतर्स की , जिन्हें टी वी वाले थ्री इडियट्स कहकर कोसते रहे । अब भई , गलती ही इतनी भारी थी , सारे देश की नाक
 
डॉ टी एस दराल
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आनंद मरा नहीं ,आनंद मरते नहीं

बात पिछले दिनों की है , बहुत दिनों से कोई फ़िल्म नहीं देखी थी ! फिर अचानक ख़याल आया कि क्यों न एक बार फिर वो ही फ़िल्म देख ली जाए जो मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक रही हमेशा , वैसे भी आजकल कम ही फिल्में " देखने " लायक़ बनती है , असल तो " दिखाना " होत
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“थ्री ईडियट्स” में आमिर खान है कहाँ?

जीनियस जीनियस होता है... उसके जरिये या उसमें अदाकारी का पुट खोजना बेवकूफी होती है। शायद इसीलिये थ्री ईडियट्स आमिर खान के होते हुये भी आमिर खान की फिल्म नहीं है। थ्री ईडियट्स पूरी तरह राजू हिराणी की फिल्म है। वही राजू जिन्होने मुन्नाभाई एमबीबीएम के जर
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अमिताभ बच्चन और रेखा कब होगे साथ साथ

अमिताभ बच्‍चन और रेखा की जोड़ी को कौन भूला होगा ? मिस्‍टर नटवरलाल, सुहाग, मुकद्दर का सिकन्‍दर और राम बलराम जैसी सुपरहिट फिल्‍मों में अभिनय के द्वारा इस जोड़ी ने 70 के दशक में युवाओ के दिलो पर अमिट छाप छोड़ी थी। आज भी अमिताभ और रेखा की रोमैटिंक जोड़ी
 
महाशक्ति
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‘पा’ की औरतें और जमाने की हिचकियां

यह लेख आज,13 दिसंबर 2009 के राष्ट्रीय सहारा के संपादकीय पृष्ठ पर छपा है। वहां भी पढ़ा जा सकता है। ‘पा’ एक असामान्य फिल्म है। इसका अलग होना सिर्फ इस मायने में नहीं है कि इसमें एक अजीब सी बीमारी प्रोजेरिया के शिकार एक बच्चे को दिखाया गया है जो १२ साल क
 
आर. अनुराधा
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