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“सामान सौ बरस का, पल की खबर नही!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

“मत्यु का समय निश्चित है!” आज दो घटनाक्रम सुनाने का मन है- 1- पाण्ड्वों के अज्ञातवास के समय बियाबान जंगल में जब पाँचों भाइयों को प्यास ने सताया तो युधिष्ठिर ने पानी लाने के लिए क्रम से सभी भाइयों को भेजा परन्तु एक भी लौटकर नही आया! अब स्वयं युधिष्ठर पानी
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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बस का सफर

मेरी कंपनी 'अग्रवाल पैकर्स एण्ड मूवर्स' के स्टाफ के सदस्यों ने इच्छा व्यक्त की कि ब्लू लाइन बसों में यात्रा करना खतरे से खाली नहीं है। अत: स्टाफ के लिए एक-दो 'चार्टर बस' का इंतजाम किया जाए।
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‘‘बेटा! अपना काम करने में शर्माना नही चाहिए।" ( डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)

गुरूनानक देव जी की कर्मस्थली नानकमत्ता साहिब में जाने का आज अचानक ही कार्यक्रम बन गया। नानकमत्ता खटीमा से दिल्ली मार्ग पर 15 किमी की दूरी पर है। लगभग पाँच वर्ष पूर्व मैंने यहाँ पाँच-छः कमरों का मकान बनाया था। इसके चारों ओर हरे-भरे खेत हैं। इस भवन का
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक