“उद्यमेन् हि सिद्धयन्ति” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
एक गाँव में एक धनवान व्यक्ति रहता था! लेकिन वह बहुत कंजूस था। रात-दिन वह इन्ही ख्यालों में लगा रहता था कि किस प्रकार उसके धन में बढ़ोत्तरी हो! परन्तु वह इसके लिए कोई उद्यम भी नही करना चाहता था। एक दिन वह सन्त रैदास जी के पास गया और बोला- “महाराज आप
Apr 18 2010 10:29 AM



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