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महापुरूषों के प्रेरक-वचन एवं कहावतें

सारा जगत स्वतंत्रता के लिए लालायित रहता है फिर भी प्रत्येक जीव अपने बंधनो को प्यार करता है। यही हमारी प्रकृति की पहली दुरूह ग्रंथि और विरोधाभास है।- श्री अरविंदसत्याग्रह की लड़ाई हमेशा दो प्रकार की होती है। एक जुल्मों के खिलाफ़ और दूसरी स्वयं की दुर्बलता
 
महाशक्ति
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प्रेम करो

जेन  संत बेन्जोई ने अपना जीवन बच्चों को शिक्षा देने और उन्हें संस्कारित करने को समर्पित किया हुआ था वे अपने आश्रम में शिक्षा देते की सभी से प्रेम करों ! असह्यों की सेवा  और मदद करों !
 
रौशन जसवाल विक्षिप्त
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साहस

फ्रांस का प्रसिद्ध योद्धा हुआ नेपोलियन। उसने रूस पर आक्रमण करना था। राह में ऐल्पस की दुर्गम पहाड़ियां थीं।ऐल्पस की पहाड़ियों को पार करना बहुत ही कठिन कार्य था। सेनापति ने नेपोलियन से कहा, “ सामने ऐल्पस की पहाड़ियां हैं, उन्हें कैसे पार करेंगे?”नेपोलियन
 
किरण गुप्ता
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प्रेरक प्रसंग : रंग में कुछ नहीं रखा

अमरीका में काले लोगों पर बहुत अत्याचार होते हैं। उन्हें समाज में आगे ब़ढ़ने के उतने अवसर नहीं मिलते जितने गोरों को। एक बार अमरीका के एक छोटे शहर में मेला लगा। उस शहर में काले-गोरे दोनों रहते थे। मेले में अनेक आकर्षण थे। उनमें से एक था रंग-बिरंगे गुब्ब
 
बालसुब्रमण्यम
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प्रेरक प्रसंग : आरुणी का साहस

आरुणी ऋषि अरुणी का पुत्र था। ऋषि धौम्य के आश्रम में वह कृषिविज्ञान और पशुपालन से संबंधित विषयों का अध्ययन कर रहा था। आरुणी ने देखा कि आश्रम की जमीन ऊबड़-खाबड़ होने से वर्षाकाल में जमीन से बहते पानी के साथ बहुत सी मिट्टी भी बह जाती है। इससे इस जमीन से अ
 
बालसुब्रमण्यम
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विनोबा जी की सीख

भूदान आन्दोलन के प्रणेता विनोबा भावे के पास एक शराब की लत वाला युवक आया 1 उसने प्रार्थना की की मैं बेहद परेशां हू मदिरा मेरा पीछा नहीं छोड़ती ! विनोबा जी ने सुना और अगले कल आने को कहा ! अगले दिन युवक आया और विनोबा जी को आवाज़ देने लगा युवक की आवाज़ स
 
रौशन जसवाल विक्षिप्त
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मौनव्रत

मौनव्रत   का सर्वाधिक महत्त्व इसी में है की साधक अपनी चित्वृतियों को संयमित कर अपने लक्ष्य पर लगा दे ! वाणी का सायं रखना वरदान रूपों में सुखद होता है ! अत: हिन्दू धर्म व जैन धर्म में मौनव्रत  की अनंत महिमा गाई गई है
 
रौशन जसवाल विक्षिप्त
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कबीर का ज्ञान

कहते हें की जब कबीर को ज्ञान हासिल हुआ, तब वे एक गाँव में गए और अपनी बातें कहीं। उनकी बात से सभी प्रभावित हुए। जब वे उस गाँव से लौटने लगे तब सभी ग्रामवासी उनके पीछे हो लिए। कबीर ने जब पूछा तो सबने कहा की उन सबको उनकी बातें इतनी अच्छी लगी हैं की हर को
 
Vibha Rani