'मजबूरी' है इसीलिए तो प्रेमचंद को याद करते हैं!
आज हम प्रेमचंद को याद कर रहे हैं। याद इसलिए कर रहे हैं क्योंकि मजबूरी है। मजबूरी यह है कि आज प्रेमचंद जयंती है। आपको पता होना चाहिए कि धारा के विरूद्ध चलने वालों को मजबूरी में ही याद किया जाता है। यही कारण है कि हमें न तो हंसराज रहबर याद आते हैं न ही
Jul 31 2009 11:12 AM



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