होलीनामा
(कुछ व्यक्तिगत और कुछ आफ़ीशियल व्यस्तताओं के कारण मैं पिछले दो माह से ब्लाग पर अनुपस्थित था। मैनें सोचा कि होली के पावन पर्व पर ब्लाग पर फ़िर वापस हो लिया जाय। आज मैं अपने पिता श्री प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव जी का एक व्यन्ग्य प्रकाशित कर रहा हूं। यह
Feb 28 2010 08:55 AM



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