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मेरे इश्क की तासीर यही है

अक्सरप्रीत की मदालस गंध के बीचआ जाती है बेपरावह सीरिश्तों की कतरनें जो बिखेरदीं  गईं हैं जान बूझकर शायद इस लिये भी की बना रहे अनुशासन तुम मुझे प्रीत थी है और रहेगी बस तुम्हारा इंतज़ार करता रहूँगा हाँ, मैं तुमसे प्यार करता
 
गिरीश बिल्लोरे
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तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ !!

वीणा की इस कविता वाले टी शर्ट होली वाले दिन पहन कर विदा कह दिया शायद ही  मै इसे अब पहन सकूं किन्तु सम्हाल के रख दिया कवर्ड में.................. !और उग आई एक प्रेम कविता देखिये तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ !!एक अधूरी चाह से तुम टुकुर टुकुर
 
गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर''