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काश ....(प्रेम दिवस पर )

प्रेम के सागर को ,प्रेम की गहराई को ,प्रेम के लम्हों को ,कब कोई बाँध पाया है ..पर इक मीठा सा एहसास ,दिल के कोने में ..दस्तक देने लगता हैजब मैं तुम्हारे करीब होती हूँकि काश ..प्यार की हर मुद्रा मेंहम खुजराहो की मूरत जैसेबस वही थम जाएलम्हे साल ,युग बसयूँ
 
रंजना [रंजू भाटिया]