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प्यार और तक़रार

रब्बाई इयाकोव की पत्नी उससे बहस करने के लिए सदा मौके की फ़िराक़ में रहती थी. लेकिन इयाकोव उसके उकसाव पर कभी ध्यान नहीं देता था और हमेशा शांत रहता. फिर एक रात भोजन के समय ऐसा हुआ कि मेहमानों के सामने अपनी पत्नी से गरमागरम तक़रार करके इयाकोव ने सभी को हैरत
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गंध

सांझ अाम सडक सिगरेटअचानक तुम ? धुएं गुबार दफन भीतर लरजते अांसू रोकतुम्हारी देह गंधहवा में जोहता रहातुम दूरबिना मुड कर देखेकहा नहीं जा रहायूं चली गई ! कारे केश देखताअाग बुझी राख गिरीकडवाहट उतराईयाद अाया वह दिन जब पी थीपहली सिगरेट ।हूं दीवानाअकेले में
 
गिरिजेश राव
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ईश्वर की परछांई

बहुत पुरानी बात है. कहीं एक भला आदमी रहता था जो सभी से असीम प्रेम करता था और सारे जीवों के प्रति उसके ह्रदय में अपार करुणा थी. उसके गुणों से प्रसन्न होकर ईश्वर ने उसके पास अपना देवदूत भेजा. “ईश्वर ने मुझे आपके पास यह कहने के लिए भेजा है कि वे आपसे
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शर्म और प्रेम

साँस उखड़ती जाती है पलकें झुकती जाती हैं गाल सुर्ख़ हुए जाते हैं ऊँगलियाँ खेलती जाती हैं बालों की घुंघराली लटों से पैर क़ुरेदते जाते हैं ज़मीन को पर लबों की हिमाकत तो देखिए कहे चले जाते हैं अभी भी हमें उनकी परवाह नहीं!
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तुम्हारे होने से

तुम्हारे होने से बहुत फर्क पड़ेगा पहाड़ पर उसकी उंचाई पर टेढ़े-मेढ़े पहाड़ी रास्तों पर और उनपर गश्त करते बादलों पर भीबादलों से भीगे हुए पहाड़तुम्हारे साथ खूबसूरत हो जाएंगे हर राह हसीन हो जाएगी और हर उंचाई..
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प्रेम के लिए प्रकृतस्थ होना जरूरी

बिना प्रकृति का सान्निध्य लिए प्रेम संभव नहीं है। यदि आपको प्रेम करना है तो प्रकृति के बीच जाकर और प्रकृति के रंग में ढ़लकर ही संभव है। यह कहने का यह मतलब यह भी नहीं है कि मैंने कोई शोध किया है अथवा दार्शनिक हो गया हूं। दरअसल, बैठे-बैठे यह विचार आया। एक
 
सुभाष चन्द्र
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मैं, मेरा दोस्त, कॉफ़ी और इलाहाबादी जोड़े : दो दृश्य

जो लोग मेरा ब्लॉग पिछले कुछ दिनों से पढ़ रहे हैं, उन्हें ये टॉपिक अटपटा ज़रूर लगेगा, पर मैं उन्हें आश्वस्त कर दूँ कि अम्मा-पिताजी पर मेरी श्रृँखला आगे की पोस्ट में चलती रहेगी. ये विषय परिवर्तन दरअसल, न्यायालय के एक फ़ैसले और एक विवादित फ़िल्म पर आजकल चल
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परदे पर प्यार के यादगार लम्हें

हर दौर की अपनी एक प्रेम कहानी होती है. और हमें वे प्रेम कहानियाँ हमारी फ़िल्मों ने दी हैं. अगर मेरे पिता में थोड़े से ’बरसात की रात’ के भारत भूषण बसते हैं तो मेरे भीतर ’कभी हाँ कभी ना’ के शाहरुख़ की उलझन दिखाई देगी. हमने अपने नायक हमेशा चाहे सिनेमा से न
 
मिहिर
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प्रतीकों के बीच गुमा प्रेम

फागुन की गुलाबी-सुनहरी सी सुबह...और रविवार का दिन...हफ्ते भर से प्रेम को लेकर की गई माथापच्ची के बाद आई छुट्टी....। प्रेम को विषय बनाकर उसकी बाल की खाल निकाली.... एंगल ढूँढें ( गोया प्रेम नहीं कोई खबर हो, फिर पत्रकार सिवा एंगेल ढूँढने के और कुछ जानता भी
 
डॉ. अमिता नीरव
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दिव्य प्रेम का अलग संसार है

प्रेम में हम सिर्फ अपने प्रियतम के बारे में सोचते हैं। इस अवस्था का वर्णन करते हुए कई लोग कहते हैं कि उन्हें भूख नहीं लगती, नींद नहीं आती। हर जगह उन्हें अपने प्रियतम का ही चेहरा दिखाई देता है। हर वस्तु उन्हें अपने प्रियतम की याद दिलाती है। अगर उन्हें वह
 
सुभाष चन्द्र
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प्रेम की पातियाँ

प्रेम मुक्त करता है, बांधता नहीं । प्रेम मुक्त गगन का पक्षी है, जो मानव ह्रदय में उड़ान भरता है । प्रेम बरसता है, गरजता नहीं । प्रेम खिलना जानता है,सिकुड़ना नहीं । प्रेम दो ह्रदयों के बीच एक अहसास है । प्रेम मांगना नहीं देना जानता है । प्रेम आँखों में
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रोमॅंटीक आयडीयाज..

जगात सगळ्यात जास्त काय महत्वाचे असेल तर ते स्वतःमधला रोमॅंटीक ’किडा’ जिवंत ठेवणे. आता वय कितीही असो.. अगदी १६ ते ७५ रोमॅंटीझम शिल्लक असेल तरच आयुष्यात काहीतरी थ्रील शिल्लक रहातं. या रोमॅंटिक वागणं- म्हणजे केवळ ’तिला’ महागड्या हॉटेलमधे घेउन जाउन खुप खर्च
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तोङने में हार है, प्रेम के पथिक की, जोङना ही जीत का आगाज होता है।

परिवर्तन वक्त का मिजाज होता है,यह हर सम्बन्ध का हमराज होता है।जहाँ को देता है मीठी सुर लहरी,जब अंतस् से दर्दीला साज होता है।मन को लुभाता है तितली-सा बहकना,पर उसूलों से बंधा बाज होता है।सहता है नदी का वियोग वो हर पल,उस पर्वत की अडिगता पर नाज होता है।तोङने
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इंसानी प्रेम में स्वार्थ है !!

प्रेम शब्द का इंसानों के लिए अलग अलग मतलब है| हर प्रेम में स्वार्थ है !माँ बाप अपने बच्चों को पाल पोसकर बड़ा करते हैं ये लालसा रहती है की बड़ा होकर सहारा बनेगा|बुढापे में सेवा करेगा! एक लड़की से लड़का या लड़के से लड़की इसलिए प्रेम करती है की बदले में वो
 
खुला सांड
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फ्रेंडशिप, लव्हशिप

‘फ्रेंडशिप डे’ आणि ‘व्हॅलेंटाईन डे’ चे फॅड यायच्या आधी म्हणजे साधारणपणे १९९०-१९९५ या काळात ‘फ्रेंडशिप’ आणि ‘लव्हशिप’ या शब्दांची फारच चलती होती. म्हणजे नविन कॉलेज प्रवेश झाल्यावर नविन मुलींशी ओळख कशी
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प्रेमात पडलेल्यांची लक्षणं….

बरेचदा असं होतं, की लोकं प्रेमात पडलेले असतात, पण त्यांचं त्यांनाच समजत नाही की आपण खरंच प्रेमात पडलोय म्हणुन. तर अशा लोकांसाठी त्यांना समजावं की आपण प्रेमात पडलो आहोत म्हणुन मुद्दाम हे पोस्ट टाकतोय. प्रेमात पडलेल्यांची लक्षणं. तुम्ही स्वतःला या मधली
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राज ठाकरे की राजनीति

महाराष्ट्र में राजनीतिक ज़मीन तलाश रही महाराष्ट्र नव निर्माण सेना रास्ता भटक चुकी है। अपनी पहचान बनने के लिया जो मन में आया वही मनमानी शुरू कर दी। मराठी अस्मिता की लडाई लड़ने वाले राज ठाकरे से बढाकर शायद ही कोई ढोंगी बिल्ला इस दुनिया में मिले। जिसे ह
 
Natkhat
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कैसा ये प्यार है

ये प्रियंका और अंजू हैं। दोनों के बीच गहरा "दोस्ताना" है। इतना गहरा कि इसके खातिर प्रियंका को अपने माँ-बाप कि हत्या करनी पड़ी। अभी कुछ दिन पहले मेरठ की प्रेम प्रयाग कालोनी में एक ओल्ड कपल कि बुरी तरह हत्या कर दी गई. हत्या के बाद उनके मुह में हलक तक कप
 
APNA SAMAJ
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नारी, प्रेम और नारीवादी

परसों एक कविता लिखी औरत के प्रेम के पागलपन पर, कमेंट मिला कि यह किसी नारीवादी की कविता नहीं हो सकती. सही बात है. इसी प्रेम वाली बात को लेकर मेरे कई वामपंथी दोस्तों को मेरे ब्लॉग का "फ़ेमिनिस्ट पोएम्स" शीर्षक नहीं ठीक लगता. वे कहते हैं कि या तो ये शीर
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शादीशुदा प्यार एक जड़ की तरह है...

मैंने अपनी एक पिछली पोस्ट ( दिल तोड़नेवाले प्रेमी या प्रेमिका से कहें, थैंक यू ) में लिखा था कि प्यार का रिश्ता एक नैचरल फूल की तरह होता है जबकि शादी का रिश्ता प्लास्टिक के फूल की तरह। इस पर दोनों ही तरह की प्रतिक्रिया आई। कुछ ने कहा, बिल्कुल सह
 
नीरेंद्र नागर
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गुनगुनाती हो !

क्यों पोत रही तुम मेरी सूखी हड्डियों पर इन्द्रधनुषी रंग उतर कर मेरे आंगन में ! क्यों जम्हाई लेने के बदले ले रही मनमोहक अंगड़ाई; चीखो और चिल्लाओ ! रोको मत बहने दो दुख भरे आँसूओं को क्यों कि मैं तो विमूढ़ हूँ देख कर तुम्हारे प्रेम से छलछलाते नयन तुम मन म
 
Harihar Jha हरिहर झा
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“कौन है? : जलालुद्दीन रूमी की कहानी

कौन है? : जलालुद्दीन रूमी की कहानी किसी ने अपनी प्रियतमा के द्वार को खटखटाया. भीतर से आवाज़ आई – “कौन है?” उसने कहा – “यह मैं हूँ!” द्वार के भीतर से आवाज़ आई – “इस घर में मैं और तुम एक साथ नहीं रह सकते
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एक और प्रेम कहानी का अंत

लो शहर की एक और प्रेम कहानी का अंत हो गया, वो भी वैलेंटाइन डे के दिन। किशन (२८) का ममता के साथ पिछले चार साल से "चक्कर" था और ये चक्कर काफी आगे निकल चुका था। दोनों संपन्न परिवारों से और सजातीय थे। लेकिन वैलेंटाइन डे के दिन किशन की लाश ममता के घर में
 
APNA SAMAJ
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प्रेमाची पहिली भेट

मुलगा म्हटला :दिलरुबा मुलगी म्हटली: पिझ्जा खिला ...! मुलगा म्हटला :पैसे नाही गं...! मुलगी म्हटली: ए... अस्सं नाही हं...! मुलगा म्हटला :महागाई आहे...? मुलगी म्हटली: तो फ़िर तु आज से मेरा भाई है...!
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पाच उत्तरे ... न मिळालेली

कथेचा पुर्वार्ध - कहाणी साठा उत्तराचीनेहमीसारखाच मी आजही ओरडत होतो!!'Kill me damn it!! Hit me!!'"हो करू ते ... पण का?""तिला नाही म्हणाला तो हरामखोर! म्हणणारच होता ... पण 'रंग दे बसंती' मधल्या त्या होम मिनीस्टर सारखे झाले. त्याला मारले पण सरकार भारत रत्न
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... आणि एक झुळूक पायावर

निळाशार गोव्याचा समुद्र,"आजतरी जमिन काबीज करुच" म्हणुन ऊसळून येणारी प्रत्येक लाट,आणि मग "येतेच परत" म्हणुन मागे जाणारी तीच लाट,भीजलेल्या वाळूमधून उघड्या पायाने केलेली पायपीट,पाण्याचा हवाहवासा वाटणारा गारवा,मंद वाऱ्याची झुळूक,अंगावर आलेले शहारे,आम्ही
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कहाणी साठा उत्तराची

डोक्याचा भुगा झालाय राव ... कोणाला काय वाटत असेल? का वाटत असेल? तसे नाही तर कसे? बापरे ईतका विचार जर कॉलेज मधे वगैरे केला असता तर अत्ता कुठेच्या कुठ गेलो असतो.विचार थांबत नाहीत ... मीही स्वस्थ बसत नाही. उगाच दहाजणाना त्रास देतो. बिचारे तेही मदत करतात