पसंद करें
0
नापसंद करें

‘नाराजके जनपदे …’: राजा के अभाव में राज्य का असुरक्षित हो जाना – बाल्मीकिरचित रामायण में प्रस्तुत विचार

महर्षि बाल्मीकि द्वारा रचित रामायण ग्रंथ में एक प्रकरण है । महाराजा दशरथ कैकेयी को दिये गये वचनों से बंधे होने के कारण न चाहते हुए भी श्रीराम को वनवास पर भेज देते हैं । तत्पश्चात् वे उनके असह्य वियोग में स्वयं प्राण त्याग देते हैं । यह सब घटित होता है
 
योगेन्द्र जोशी
पसंद करें
0
नापसंद करें

प्राचीन भारत में गणतंत्र

लोकतंत्र राजनीति का आधुनिक सिद्धांत है. यह, हालांकि राजनीतिक व्यवस्था को तय करनेवाली एक प्रणाली है, जो नागरिकों को अपनी अधिकार चेतना से समृद्ध करने, उनमें आवश्यक नागरिकताबोध पैदा करने का काम करती है. इसके द्वारा सत्ता पर जनता का अंकुश बना रहता है. व्
 
kashyap omprakash
पसंद करें
0
नापसंद करें

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् और राजधर्म – प्रजासुखे सुखं राज्ञः …

आचार्य चाणक्य के नाम से प्रायः हर भारतवासी परिचित होगा । उन्हें अवसर के अनुरूप हर प्रकार की नीति अपना सकने वाले एक अतिसफल राजनीतिज्ञ के तौर पर जाना जाता है । उनका काल चौथी सदी ईसवी पूर्व बताया जाता है । वे तत्कालीन यूनानी शासक, सिकंदर महान, के समकालीन
 
योगेन्द्र जोशी
पसंद करें
0
नापसंद करें

‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ इत्यादि – मनुस्मृति के वचन

‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते …’ कहते हुए समाज में स्त्रियों को सम्मान मिलना चाहिए की बात अक्सर सुनने को मिलती हैं । सम्मान तो हर व्यक्ति को मिलना चाहिए, चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, बालक हो या वृद्ध, धनी हो या निर्धन, आदि । किंतु देखने को यही मिलता है
 
योगेन्द्र जोशी
पसंद करें
0
नापसंद करें

प्रागैतिहासिक भारत में व्यापार एवं शिल्पकार-संगठन

इस बात के पर्याप्त साक्ष्य हैं कि सभ्यता के लंबे विकास-क्रम में व्यापार निरंतर तरक्की करता जा रहा था. लोगों की आवश्यकताएं भी बढ़ रही थीं. इसलिए यह संभव नहीं रह गया था कि एक ही स्थान पर मनुष्य की जरूरत की समस्त वस्तुओं का उत्पादन संभव हो सके. कच्चे माल
 
kashyap omprakash
पसंद करें
0
नापसंद करें

कौन कहता है..भारत टूट नहीं सकता ??????

भारत के बारे हम लोगों में इतनी गलतफहमियां है हमारे मन में कि हमें लगता है कि भारत का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अक्सर आपने, मैने औऱ दूसरे लोगों ने सुना या कहा ज़रुर होगा कि हमारे देश का कभी कुछ बिगड़ सका...हमारे नेताओं के मुंह पर हर वक्त रहता है कि भारत
 
शशांक शुक्ला