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फाग-छंद ( संकलित ) - 2

बिहारी  फाग-रंग चढ़ गया है इन दिनों सब पर ! नदा कर चुप बैठा हूँ, ये ओरहन सुनना ठीक नहीं । अपना कौन-सा रंग है ख़ालिस कि रंगूँ उससे ! सो परिपाटी का रंग चढ़ा रहा हूँ । मेरा उद्यम इतना ही है कि जिन कवियों के नाम आप यहाँ देखेंगे, उनकी रचनाओं से फाग-छंद छाँट
 
हिमांशु । Himanshu
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फाग-छंद ( संकलित ) - 1

घनानंद (राग केदारौ) फाग-रंग चढ़ गया है इन दिनों सब पर ! नदा कर चुप बैठा हूँ, ये ओरहन सुनना ठीक नहीं । अपना कौन-सा रंग है ख़ालिस कि रंगूँ उससे ! सो परिपाटी का रंग चढ़ा रहा हूँ । मेरा उद्यम इतना ही है कि जिन कवियों के नाम आप यहाँ देखेंगे, उनकी रचनाओं से
 
हिमांशु । Himanshu