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वक़्त नहीं

प्रस्तुति- पंकज चतुर्वेदी हर खुशी है लोगों के दामन में, पर एक हँसी के लिए वक़्त नहीं. दिन रात दौड़ती दुनिया में, ज़िन्दगी के लिए ही वक़्त नहीं माँ की लोरी का एहसास तो है, पर माँ को माँ कहने का वक़्त नहीं सारे रिश्तों को तो हम मार चुके, अब उन्हें दफ़नाने
 
सहज साहित्य