पसंद करें
0
नापसंद करें

लेडीज क्लब की अवधारणा के बहाने

शायद ही कोई दिन ऐसा खाली गुजरता हो जिस दिन शहर के किसी लेडीज क्लब की खबर, महिलाओं की तस्वीरों के साथ, अखबार में न छपती हो। लेडीज क्लब से जुड़ी सभी महिलाएं किसी न किसी ऐलिट वर्ग से आती हैं। न चाहते हुए भी, जब भी, उनकी खबरों पर मेरी निगाह गई है, उनमें कोई
 
अंशुमाली रस्तोगी
पसंद करें
0
नापसंद करें

एक खत वेलेंटाइन के नाम

तुम्हारा फिर से स्वागत है।तुम भी क्या खूब चीज हो। जब तुम्हारे आने की तारीख नजदीक आती है, तब ही हमारे दिलों में अपने-अपने प्रेम और तुम्हारे प्रति अपनत्व की भावना जागृत होती है। यह कहने में कोई शर्म नहीं कि हम तुम्हें साल में सिर्फ एक बार यानी 14 फरवरी को
 
अंशुमाली रस्तोगी
पसंद करें
0
नापसंद करें

आदतवश

बात तेरह साल पहले की है । मेरे पड़ौस में एक परिवार रहता था । उनके दो बेटे थे । माँ अक्सर अपने बेटों को बात-बात पर डाँटती रहती थी । डाँटते समय उनके मुख से हमेशा हरामजादा शब्द निकलता था । मैं जब भी इस शब्द को सुनता तो मुझे बहुत अजीब-सा लगता था । मैं सोचता
पसंद करें
0
नापसंद करें

यहां विचारधारा नहीं व्यक्तिविशेष ही सबकुछ

भारतीय जनता पार्टी में न असहमतियों न ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए कहीं कोई जगह है। वहां दोनों ही चीजें एकदम हाशिए पर हैं। भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा खासा फासीवादी है। वहां न किसी को सुना जाता है न ही समझा। यह पार्टी बस कुछ वरिष्ठों के
 
अंशुमाली रस्तोगी