पाँच दिनों का त्यौहार
चम चम करती आ ई दिवाली घर घर दीपक जलते हैं द्वार द्वार सजी रंगोली रंग अनेक मन हरते हैं उठती रसोई से सुगंध मनमोहक लड्डू बर्फी बालूसाही कितने पकवान कितनी मिठाई फुलझडी की तड तड संग किलकारियां फुवारों के संग चकरियां प्यारियां वो देखो बदमाश हरा बम्ब लाया क
Oct 15 2009 02:06 PM



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