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ग्‍लोबलाइजेशन चीजों को टुकडों में देखता है - प्रभाष जोशी - बातचीत - 1997 प्रभात खबर

राष्‍ट्रीय पुनरनिर्माण के मुद्दों पर बहस में भाग लेने आए लोगों में वरिष्‍ठ पत्रकार प्रभाष जोशी भी अन्‍य वक्‍ताओं के साथ अनुग्रहनारायण संस्‍थान की अतिथिशाला में ठहरे थे। सुबह नौ बजे मैं पहूंचा तो कमरे में आसा के एकाध लडके थे। बेड पर उनकी चौडे पाढ वाली
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ये तो प्रभाषवाद ही है

वाल्मीकि रचित रामायाण और तुलसी के रामचरितमानस में 'राम राज्य Ó और 'मर्यादापुरूषोत्तम रामÓ का बखान किया गया। राम राज्य आएगा, लोग कहते आ रहे हैं, लेकिन कब, कोई नहीं जानता। उसी प्रकार आज की वह पीढ़ी जो पत्रकारिता में आई है, विशेषकर हिंदी पत्रकारिता में उसके
 
सुभाष चन्द्र
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प्रभाष जोशी- क्रिकेट के लिए जिए.....

बीती रात भारत-आस्ट्रेलिया का पांचवां एक-दिवसीय मैच कई मायनों में न भुला पाने वाला सबक दे गया !सचिन के अतुलनीय पराक्रम के बाद भारत ने सिर्फ़ एक मैच ही नहीं गंवाया बल्कि अपने एक सच्चे सपूत को भी खो दिया जो किसी मैच की हार-जीत से परे बहुत बड़ी क्षति
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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धर्म को लेकर अपराधबोध क्यूं

अजीत कुमार प्रभाष जी किस तरफ के हैं। यह मेरे लिखने का उद्देश्य कभी नहीं रहा है। आखिर किन्हीं दो व्यक्तित्वों के बीच क्या कभी सीधी रेखा खींची जा सकती है। मेरे हिसाब से तो खीचने की कोशिश भी नहीं होनी चाहिए। मुझे तो प्रभाष जी को याद करते हुए वो सभी जन य
 
संदीप पाण्डेय
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पत्रकारिता के शिखर पुरुष प्रभाष जोशी

पत्रकारिता के शिखर पुरुष प्रभाष जोशी हिन्दी पत्रकारिता के भीष्म पितामह प्रभाष जोशी हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़ गए हैं। उनके साथ ही 'मिशन पत्रकारिता' के एक पूरे युग का अंत हो गया है। प्रभाषजी पत्रकारिता के भीष्म पितामह जरूर थे लेकिन जब-जब पत्रकारिता
 
अमलेन्दु उपाध्याय
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प्रभाष जी की जनसत्ता सही मायनों में जनतंत्र की प्रयोगशाला ( खंड 3)

प्रभाष जोशी को गुजरे कुछ दिन बीत गए हैं टीवी चैनल बनने की होड़ में शामिल हमारे कुछ साथी अपनी हिटृस व टीआरपी बढने के लिए विवादों की अपनी दुकान दोबारा सजा कर बैठ गए हैं। बहरहाल हम अपने ब्लाग पर प्रभाष जी को अपने साथियों की नजर से याद कर रहे हें इस कड़ी
 
संदीप पाण्डेय
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निर्भय निर्गुण गुण रे गाऊंगा (प्रभाष जोशी भाग-२)

प्रभाष जी पर अपने आरंभिक श्रद्धांजलि लेख के बाद अजीत सर ने एक बार फ़िर उनकी स्मृतियों को अपनी तरह से याद किया है.आप भी पढ़ें और अपनी राय दें- संदीप प्र भाषजी अपने पसंदीदा गायक कुमार गंधर्व के इस भजन को ताउम्र सुन सुनकर रीझते रहे। आखिर रीझते भी क्यूं न
 
संदीप पाण्डेय
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प्रभाष जी का जाना ...

प्रभाष जी चले गए। सचिन और क्रिकेट के दीवाने से टीम इंडिया की ऐसी रुसवाई देखी नही गई। सचिन जब आउट होता है और इंडिया हार जाती है तो क्रिकेट प्रेमी अक्सर दर्शक दीर्घा या कमरा छोड़ जाते हैं। प्रभाष जी दुनिया ही छोड़ गए। अगर वो होते तो निश्चित तौर पर सचिन
 
हिमांशु बाजपेयी
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वह प्राणवान भावावेश-प्रभाष जोशी

प्रखर पत्रकार और गाँधीवादी विचारक प्रभाष जोशी का असमय गुजर जाना.......} रात दो बजे मोबाइल की घंटी बजी तो एक बार तो बंद कर दी। पर वह फिर बजी। दूसरी तरफ रवीन्द्र त्रिपाठी थे। एक दुखद खबर, इससे शुरू कर खबर दी की प्रभाषजी का निधन हो गया। अरे! कहकर मोबाइल
 
सदाग्रह शांति सद्भावना के लिए...
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प्रभाष जी आपको स्कोर का अपडेट, सीरीज का अपडेट कहां बताना होगा? अपना नया पता, नया फोन नंबर तो बताकर जाते।

प्रभाष जी अपने जानने वालों को अक्सर एक किस्सा सुनाते थे। ईमानदार मारवाड़ी का किस्सा। कहते थे एक ईमानदार मारवाड़ी जब मरा तो उसके बहीखाते में कई किस्म का खाता था। लाभ खाता- हानि खाता- दान खाता जैसे कई खाते....पन्ने उलटने पर पता चला कि मारवाड़ी का एक व्
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प्रभाष जोशी की एक कृति मैं भी

प्रभाष जोशी जी की एक कृति मैं भी हूं। 1996-97 में जो के.के. बिड़ला फाउंडेशन फेलोशीप मुझे मिला उसके लिए मैंने पहले से आवेदन नहीं कर रखा था। पता नहीं उन्होंने मेरे में क्या खूबी देखी कि बुलाकर यह फेलोशीप दिलवा दी। यूं तो मैं छात्र जीवन से ही एक्टविस्ट
 
एम. अखलाक
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पत्रकारिता के कबीर पुरुष का अवसान

श्रवण गर्ग कोई चालीस साल पहले, गांधी शताब्दी वर्ष के दौरान, तब बत्तीस-तैंतीस वर्ष के प्रभाष जोशी इंदौर के निकट स्थित कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट के कार्यकारी मंत्री स्व. श्यामलालजी की एक सिफारिशी चिट्ठी गांधी स्मारक निधि, राजघाट के सचिव दे
 
ambrish kumar
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आखिर जनसत्ता में ऐसा क्या है ?

आखिर जनसत्ता में ऐसा क्या रहा है कि कोई व्यक्ति कम पैसे में भी उसकी नौकरी स्वीकार करे ? इसका जवाब जनसत्ता व प्रभाष जोशी तथा उसके परिवर्ती संपादकों के व्यक्तित्व में खोजना होगा। हालांकि जनसत्ता और उसके पूरे परिवार का व्यक्तित्व गढ़ने में प्रभाष जोशी क
 
ambrish kumar
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ब्लाग जगत का प्रभाष पाठ

प्रभाष जोशी नये विचार और नयेपन के लिए हमेशा तैयार रहते थे और उस्का विरोध करने की बजाय उसका स्वागत करते थे। नयी तकनीकि के घोड़े पर सवार होकर जब ब्लाग ने अपना पैर पसारा तो प्रभाष जोशी ने इसका विरोध करने की बजाय इसका स्वागत किया। वे खास कुछ समझते नहीं थ
 
संजय तिवारी
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'सर कटाने की नौबत आई तो कटने वाला पहला सर प्रभाष जोशी का होगा'

प्रभाष जोशी को एक आंदोलन की श्रद्धांजलि अनुराग शुक्ला ऑफिस से निकल चुका था लेकिन सिटी एडिशन से सुशील का फोन आया कि प्रभाष जी नहीं रहे. यकीन नहीं हुआ, टीवी चैनलों को उलटना पुलटना शुरू किया. लेकिन कहीं कोई सूचना नहीं थी. दिल्ली के दो चार साçथयों को फोन
 
नई पीढ़ी
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एक ऋषितुल्य संपादक की विदाई

यदि कोई संपादक अपने किसी मामूली संवाददाता के लेखन की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए भी अपनी खुद की नौकरी दांव पर लगा दे तो उसे आप क्या कहेंगे ? यदि वही संपादक अपने पुत्र के कैरियर को नुकसान पहुंचा कर भी अपने सहकर्मी पत्रकार की स्वतंत्रता की रक्षा करे तो
 
Surendra Kishore
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आईआईएमसी में पहला असाइनमेंट और प्रभाष जी!

संदीप कुमार झारखंड के एक निपट देहात (गिरिडीह ज़िले के बगोदर से) से दिल्ली पहुंचा था आईआईएमसी में पत्रकारिता की पढ़ाई करने। ये अगस्त 2005 था। हमारे टीचर हेमंत जोशी ने शायद अपनी पहली ही क्लास में हमें एक गज़ब का एसाइनमेंट दे डाला। प्रभाष जी के लेखन पर
 
मृगेंद्र पांडेय
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हमारी कक्षा में प्रभाष जोशी

कल श्री प्रभाष जोशी ब्याख्यान देने आने वाले हैं. सुखद आश्चर्य के साथ उत्सुकता भी हुई. इतने बडे समूह इंडियन एक्सप्रेस के समाचार पत्र जनसत्ता के संस्थपक सदस्य हम सब के बीच। वाह ! पहले ब्याख्यान के बाद से ही पूरी कक्षा बडी बेसब्री से उनका इंतजार करने लग
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जाना प्रभाष जोशी का

प्रभाष जोशी नहीं रहे। समकालीन हिन्दी पत्रकारिता में उनकी स्थिति वही रही जो हिन्दी साहित्य में तुलसीदास की है। उनके वैचारिकी से आप चाहंे जितने भी असहमत हों आपको उनकी प्रतिभा,समर्पण और प्रतिबद्धता का सम्मान करना ही होता है। वाम प्रगतिशीलता और दक्षिणी ध
 
रंगनाथ सिंह
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प्रभाष जोशी- एक युग का अवसान

दैनिक 1857' के दिनांक 7 नवंबर के अंक में आलोक तोमर के दैनिक स्तंभ में प्रकाशित आलेख गुरुवार की रात और रातों जैसी नहीं थी। इस रात जो हुआ उसके बाद आने वाली कोई भी रात अब वैसे नहीं हो पाएगी। रात एक बजे के कुछ बाद फोन बजा और दूसरी ओर से एक मित्र ने कहा,
 
एस.एन. विनोद !
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प्रभाष जोशी पर शोक की खबर भेजने पर डांटा गया पत्रकार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक पत्रकार का फोन आया ,बोला देश के वरिष्ठ राजनेता नानाजी देशमुख से प्रभाष जोशी के बारे बातचीत कर एक खबर भेजी तो डेस्क के पत्रकार ने नाराजगी जताते हुए ऐसी खबरे भेजने से मना किया .नाराज संवादाता ने कहा -यह देश का ही नहीं विश्व क
 
ambrish kumar
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प्रभाष जोशी की मौत, दैनिक जागरण के लिए एक कॉलम की खबर

पत्रकारिता के पितामह प्रभाष जोशी की मौत से पूरी पत्रकारिता बिरादरी शोक मना रही है. पत्रकारिता में प्रभाष जोशी के स्थान क्या है इसे कहने की जरूरत नहीं है. लेकिन प्रभाष जोशी की मौत के बाद दैनिक जागरण ने जिस तरह से अपनी खुन्नस निकाली है उसने देश के इस स
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कितने सरल और सीधे थे प्रभाष जी!

प्रभाष जी नहीं रहे!! नहीं- नहीं, प्रभाष जोशी नाम का कोई और पत्रकार होगा... सुबह ऑफिस पहुंचते ही टीवी  पर देखा तो यकीन नहीं हुआ। मौत कोई अनोखी बात नहीं। फिर भी अक्सर हैरान करती है। मैं उनसे कभी मिली नहीं  ल
 
पूजा
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दिल-ए-नादाँ

कल प्रभाष जी पर लिखी मेरी पोस्ट के बाद चेन्नई से मित्र शशिभूषण की एक लम्बी टिप्पणी आयी उसे आप सब से साझा कर रहा हूँ। शशि कहानियाँ और कवितायें लिखते हैं और इन दिनों केन्द्रीय विद्यालय में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं... संदीप, सुबह मैंने ब
 
संदीप पाण्डेय
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एक विकट क्रिकेटप्रेमी को क्रिकेट जगत की श्रद्धांजलि

सचिन की आतिशी पारी के बावजूद भारत की हार के साथ हिंदी पत्रकारिता के शिखर पुरुष और क्रिकेट के जबर्दस्‍त रसिक प्रभाष जोशी इतने मायूस हुए कि दुनिया को ही अलविदा कह दिया। प्रभाष जी- जो क्रिकेट और टेनिस के दीवाने थे- अपने शब्दों के जरिए पाठकों और क्रिकेटप
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प्रभाषजोशी का आधुनि‍क मंत्र :प्रेस का काम है छापना

प्रेस में आजकल इनदि‍नों जि‍स तरह का माहौल है उसे तोड़ने और समझने में प्रभाषजी का नजरि‍या हमारे लि‍ए रोशनी प्रदान कर सकता है। आम तौर पर अखबार के संपादक और उपसंपादक अपने नजरि‍ए के अनुकूल सामग्री छापने की फि‍राक में रहते हैं। अपने वि‍चारों से सहमत लेखक
 
jagadishwar chaturvedi
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राष्ट्रीय सहारा , अमर उजाला , जनसत्ता , भास्कर और हिन्दुस्तान ने दी प्रभाष जोशी को श्रद्धांजलि , दैनिक जागरण में सिंगल कॉलम की खबर, नभाटा में खबर नहीं

आज के हिन्दी अखबारों में प्रभाष जोशी की शख्सियत को बयान करते कई लेख छपे हैं । कई वरिष्ठ पत्रकारों ने उनके निधन को एक युग का अंत बताते हुए अपने संस्मरण लिखे हैं । लेकिन सबसे हैरत हुई नवभारत टाइम्स को देखकर । इस अखबार में लेख और संपादकीय तो छोड़िए हमें
 
media marg
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प्रभाष जोशी के न होने का अर्थ

प्रभाष जोशी के बिना पहला एक दिन "कोई हरकत नहीं है पंडित"। किसी बात को हवा में उड़ा देने के लिए हमारे प्रभाष जी का यह प्रिय वाक्य था। फिर कहते थे "अपने को क्या फर्क पड़ता है'। अभी एक डेढ़ महीने पहले तक इंटरनेट के बहुत सारे ब्लॉगों और आधी अधूरी वेबसाइट
 
कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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ऐसी भी क्या जल्दी थी

एक शाम हिमांशु का फोन आया। उसने कहा, “क्या करें! प्रभाष जी तो हाथ ही नहीं आ रहे हैं। अब बिना बातचीत के रिपोर्ट कैसे बनाएं।” तत्काल उनकी (प्रभाष जोशी) माताराम की इक बात दिमाग में चक्कर काटने लगती है, जिसका जिक्र स्वयं उन्होंने अपने कागद कारे में किया
 
खंभा
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हमसे ओझल हुआ पत्रकारिता जगत का सितारा प्रभाष जोशी !

अभी कल ( पांच नवंबर) रात की ही बात है जब सचिन ने अपना ४५वां शतक और अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय में १७ हजार से ज्यादा का आंकड़ा पार किया। हमें अब सचिन की उपलब्धि से ज्यादा उत्सुकता इस बात की थी कि भारत की मामूली रनों से हार और सचिन की शानदार बल्लेबाजी पर प
 
डा.मान्धाता सिंह
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प्रभाष जोशी का यूँ चले जाना

प्रभाष जोशी का यूँ चले जाना जनसंगठनों की क्षति और जन सरोकारी पत्रकारिता में निर्वात वरिष्‍ट पत्रकार श्री प्रभाष जोशी का निधन न सिर्फ पत्रकारिता बल्कि देश के जनसंगठनों के लिए भी अपूरणीय क्षति है। ऊनके निधन से दोनों ही स्‍थानों पर निर्वात महसूस किया जा
 
RTI UP
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प्रभाष जोशी का पार्थिव शरीर इंदौर पहुंचा, शनिवार को होगा अंतिम संस्कार

पत्रकारिता के पितामह प्रभाष जोशी का पार्थिव शरीर इंदौर पहुंच गया है. उनका पार्थिव शरीर इंदौर के उनके आवास पर रखा गया है जहां से शनिवार को सुबह आठ बजे उनके गांव बड़वाहा के लिए प्रस्थान करेगा जहां नर्मदा के किनारे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. प्रभाष
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जनसंगठनों की क्षति और जन सरोकार की पत्रकारिता में निर्वात

वरिष्‍ठ पत्रकार श्री प्रभाष जोशी का निधन न सिर्फ पत्रकारिता बल्कि देश के जनसंगठनों के लिए भी अपूरणीय क्षति है। ऊनके निधन से दोनों ही स्‍थानों पर निर्वात महसूस किया जा रहा है। श्री जोशी देशभर के सामाजिक समूहों से न सिर्फ जुड़े रहे हैं बल्कि उन्‍होंने
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प्रभाष जोशी जी ने दी पत्रकारिता छात्र आन्दोलन को नई धार

हिन्दी पत्रकारिता के पितामह और पत्रकारिता के पेशेगत आदर्शाें को एक नई ऊंचाई देने वाले प्रभाष जोशी अब हमारे बीच नहीं रहे। एक बारगी सुनकर यकीन नहीं हुआ कि जन अधिकारों और प्रजातांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाला पुरोधा अचान
 
विजय प्रताप
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प्रभाष जोशी अमर रहेंगे

हिंदी पत्रकारिता के शिखर पुरूष प्रभाष जोशी के निधन से हिंदी और पत्रकारिता ही नहीं, बल्कि जन सरोकारों वाले आंदोलनों को ही धक्का लगा है। विलक्षण प्रतिभा के धनी प्रभाष जी ने अपने पत्रकारीय धर्म का निर्वहन करते हुए जन सानस में वह जगह बनाई, जो शायद ही किस
 
जन शिक्षा ब्लॉग
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प्रभाष जी के बिना हिन्दी पत्रक्रारिता अनाथ हो गयी है

प्रभाष जोशी का निधन हिन्दी पत्रकारिता जगत के लिये एक अपूरणीय क्षति है । वे न केवल एक महान पत्रकार थे बल्कि एक महान विचारक भी थे । हिन्दी पत्रकारिता को उन्होने उच्च मूल्य प्रदान किए तथा पत्रकारिता को एक नया मुहावरा भी दिया । नयी भाषा , नए तेवर लेकर जन
 
Atul CHATURVEDI
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आज वाणी अवाक् है

कई बरस बीत गए, शायद अस्‍सी के दशक की बात है। हरिद्वार के पत्रकारों की संस्‍था भारतीय संवाद परिषद् ने तब व्‍याकरणाचार्य पं.किशोरीदास वाजपेयी कर स्‍मृति में व्‍याख्‍यानमाला का आयोजन किया था। नवभारत टाइम्‍स के संपादक पत्रकार-प्रवर राजेन्‍द्र माथुर मुख्‍
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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प्रभाष जोशी

समय का सबसे समर्थ हस्ताक्षर राजकिशोर किसी भी लेखक के लिए सबसे बड़ी बात यह होती है कि वह अपने जीवन काल में ही लीजेंड बन जाए। जैसे निराला जी या रामविलास शर्मा हिन्दी जगत के लीजेंड थे और आज भी उनकी यह हैसियत बनी हुई है। हिन्दी पत्रकारिता में प्रभाष जोशी
 
राजकिशोर
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प्रभाष जोशी- एक प्रकाश-पुंज अस्त हो गया (श्रद्धाँजलि)

श्रद्धांजलि - प्रेमचंद सहजवाला आज की सुबह सचमुच मेरे लिए एक दुखद समाचार लाई. दिन बहुत सामान्य तरीक़े से शुरू हुआ कि मोबाइल पर एक सन्देश आया, जिसे पढ़ कर हृदय को बहुत गहरा धक्का पहुंचा. सन्देश सुनीता शानू ने भेजा था - 'प्रभास जोशी जी नहीं रहे. आज का द
 
नियंत्रक । Admin