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जब दवा ही मर्ज बन जाए (बुनियादी संकटों के तकनीकी समाधान नहीं हो सकते) / – सुनील –

प्लास्टिक और पॉलीथिन आधुनिक विज्ञान और तकनालाजी की एक चमत्कारिक देन है। इसने पैकिंग और पैकेजिंग में एक क्रांति ला दी है और उसे काफी सुविधाजनक बना दिया है। कागज, लकड़ी, बांस, बेंत, घास, जूट, सूत, लोहा, टीन, पीतल, कांच, मिट्टी आदि की बनी वस्तुओं की जगह
 
Aflatoon अफ़लातून
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होली है तो पर...

 पर्यावरण को सुरक्षित रखना हम सब की जिम्मेदारी होती है...जहां तक परंपराओ की बात है...तो वह समय और परिस्थिति के अनुसार बदलती रहती है...बढ़ते प्रदुषण को देखते हुए यह कहना सही होगा....कि अब हरियाली से होली खेलना बंद कर देना चाहिए...और यही समय की दरकार
 
acharyakeshav
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प्रदूषण उन्मुक्ति में साहित्य की भूमिका एवं वैदिक साहित्य में पर्यावरण -------डा श्याम गुप्ता का aalekh

प्रदूषण उन्मुक्ति में साहित्य की भूमिका एवं वैदिक साहित्य में पर्यावरण साहित्य व पर्यावरण यद्यपि अलग अलग संस्थाएं हैं, एक कला क्षेत्र दूसरा विज्ञान का क्षेत्र | परन्तु विज्ञान कहाँ नहीं है, कला कहाँ नहीं है,उनमें घनिष्ठ सम्बन्ध है क्योंकि दोनों ही का
 
Dr. shyam gupta
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कॉमनवेल्थ गेम्स: दिल्ली के हाथ में देश की नाक

कॉमनवेल्थ गेम्स को लेकर हर तरफ चिंता है। प्रधानमंत्री भी चिंतित हैं और मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी। मेयर ने तो सभी उद्योगों को बंद करने की अभी से सलाह दे दी है ताकि विदेशी आएं तो उन्हें दिल्ली का दामन प्रदूषण से काला महसूस न हो। कम से कम ऊपरी तौर पर ही
 
दिलबर गोठी
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प्रदूषण का एक घातक असर यह भी

अमेरिकी अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार वायु प्रदूषण फेफड़ों के लिए ही नहीं बल्कि शुक्राणुओं के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है. नेशनल अकेडमी आफ साइंस की पत्रिका में प्रकाशित कनाडा में हुए इस अध्ययन के अनुसार वायु प्रदूषण से न केवल शुक्राणुओं की संख्या घटती
 
पर्यानाद
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पर्यावरण प्रदूषण (निवारण और समाधान)3

पिछली कडियों पर्यावरण प्रदूषण (निवारण और समाधान)1 और  2 में आपने यज्ञ (हवन) के महत्त्व के बारे में पढा। अब आगे पढिये यज्ञ के लघुत्तम रूप में प्रचलित धूप, अगरबत्ती आदि क्या यज्ञ के विकल्प हैं। अग्नि में डालने से कोई पदार्थ नष्ट नही हो जाता है, बल
 
अन्तर सोहिल
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पर्यावरण प्रदूषण (निवारण और समाधान)2

गतांक से आगे… यज्ञ का लघुत्तम स्वरूप "अग्निहोत्र" है जो एक वैदिक प्रक्रिया है। आजकल विश्व के कई देशों में बीमारियां दूर करने, प्रदूषण रोकने, एवं कृषि उत्पादन को बढाने के लिये "अग्निहोत्र" को गृह-चिकित्सा (HOME THERAPY) के रूप में अपनाया जा रहा है। गा
 
अन्तर सोहिल
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अंतराल

मेरे पुरखे कितने विवश और असहाय रहे होंगे उन्हें इस प्यारी धरती को मेरे हवाले कर के आखिर जाना पड़ा . मेरे बच्चों के बच्चे कितने विवश और असहाय होंगे कैसी धरती होगी जिसे मैं उनके हवाले कर के जाऊँगा ! इस अंतराल में कोई विवश और असहाय नहीं है तो वह मैं हूँ
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पर्यावरण प्रदूषण (समस्या और कारण)4

रक्षा कवच में छेद पृथ्वी की सतह से ऊपर आकाश में विद्यमान वायुमण्डल में नाइट्रोजन। आक्सीजन, कार्बनडाइआक्साईड, ओजोन आदि गैसों के मिश्रण से बनी अनेक परतें होती हैं (ऐसा वर्णन वेदों में भी आया है)। इन गैसों में ठोस प्राणवायु (ओजोन) नामक गैस की मात्रा बहु
 
अन्तर सोहिल
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पर्यावरण प्रदूषण (समस्या और कारण)3

खाद्यान्नों की बढती हुई मांग को पूरा करने के लिये खेतों में रासायनिक खादों का अन्धाधुंध प्रयोग किया जा रहा है। परिणामस्वरूप कृषि योग्य उपजाऊ भूमि की उर्वरा तथा जलधारण करने की शक्ति/क्षमता एवं चिकनाई समाप्त होती जा रही है तथा खाद्यान्न के उत्पादन में
 
अन्तर सोहिल
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पर्यावरण प्रदूषण (समस्या और कारण)2

पिछली कडी में आपने पढा कि "प्रदूषण से उत्पन्न महाविनाश के खिलाफ सामूहिक तौर पर यदि कोई उपाय न किया गया तो इस युग में मानव जीवित नहीं रह पायेगा" अब आगे….…… नदी, नहरें, तालाब, झीलें, कुएँ जो सिंचाई के महत्त्वपूर्ण साधन हैं, क्लोराइड्स, पेस्टिसाईड्स व अ
 
अन्तर सोहिल
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पर्यावरण प्रदूषण (समस्या और कारण)1

गतांक से आगे विषय भोगों को अधिकाधिक मात्रा में भोगने की लालसा ही, आज के संसार में उत्पन्न हुवे अनियंत्रित औद्योगिकीकरण के पीछे मुख्य कारण है। इसी के परिणाम स्वरूप आज सडकों, नहरों, बांधों, रेलों, कारों, बसों, संचार साधनों, कल-कारखानों, तकनीकी यंत्रों
 
अन्तर सोहिल
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दीपक, धूप, अगरबत्ती, मोमबत्ती किसलिये

विश्व के लगभग सभी मत, पंथ, सम्प्रदायों में चाहे वे हिंदू हों या मुस्लिम, ईसाई हों या यहूदी, पारसी हों, बौद्ध या जैन, यहां तक कि पिछडे प्रदेशों में रहने वाली जंगली जातियों व कबीलों में भी, किसी न किसी रूप में यज्ञ की प्रथा आज भी विद्यमान है। देश, काल
 
अन्तर सोहिल
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बोतल-बंद पानी का दूसरा पहलू

हममें से कई लोगों के लिए बोतल-बंद पानी एक वरदान है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिन्हें देश के दूर-दराज इलाकों में बारबार यात्रा करनी पड़ती है। बतल-बंद पानी उन्हें कई बीमारियों से बचाता है। पर पानी के इस रूप का एक उन्य पहलू भी है, उससे भी परिचित हो लीजिए
 
बालसुब्रमण्यम
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सावधान प्रदूषण अपनी विकरालता में दिनोदिन बढ़ोत्तरी करता चला जा रहा है

आज हम चारों तरफ से समस्याओं से घिरे हुए हैं । सर्वव्यापी वायु प्रदूषण अपनी विकरालता में दिनोदिन बढ़ोत्तरी करता चला जा रहा है । ध्वनि प्रदूषण की मात्रा तथा भयावहता सीमा तोड़ती नजर आ रही है । आसपास सड़कों पर कचरा बिखरा रहता है । नालियाँ कचरे से जाम हो गई हैं
 
सुरेश पण्डा