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शहीदे आज़म भगतसिंह की याद में (भाग-3)-एक इंकलाब की भारी ज़रूरत है।

भाग-१ के लिए यहाँ क्लिक करें।भाग-२ के लिए यहाँ क्लिक करें।क्या इसी हिन्दुस्तान का चित्र आँखों में लिए हुए भगतसिंह फाँसी पर चढे थे? क्या उनकी कल्पना का हिन्दुस्तान ऐसा ही था? नहीं, बात ऐसी नहीं, भगतसिंह तो बहुत दूर की बात, हिन्दुस्तानी आज़ादी आन्दोलन में
 
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अनुसूचित जाति के ताकतवर लोगों पर विशेष नज़र रखने की ज़रूरत है

यह सच है कि अनुसूचित जातियों-जनजातियों के अधिकारों की रक्षा के लिये सरकारी स्तरों पर कड़े कानून होने के बावजूद देश भर में उनपर अगड़ी जाति के प्रभावशाली लोगों के अत्याचार बदस्तूर जारी हैं, लेकिन पिछले कई दशकों से देश में इन जातियों के लिये उपलब्ध आरक्षण की
 
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कामरेड बसु केसरिया सलाम

हालाँकि यह उपयुक्त मौका नहीं है कि किसी दिवंगत व्यक्ति की आलोचना की जाए परन्तु जब देखा जाता है कि सारी पार्टियाँ, पूँजीवादी अखबार और तमाम ब्लॉगर बुद्धिजीवी तक एक स्वर में कह रहे हैं कि ‘‘साम्यवाद का स्तंभ ढह गया’’ तब मजबूर होकर इस मामले में अपनी राय
 
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सर्वशक्तिमान ईश्वर की झूठी अवधारणा को ध्वस्त करने के लिए खगोलशास्त्र एवं खगोलीय घटनाओं का वैज्ञानिक विष्लेषण आज की महती आवश्यकता है

सहस्त्राब्दि का सबसे लम्बा सूर्यग्रहण सम्पन्न हुआ । एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना के हम प्रत्यक्षदर्शी बने मगर इसके साथ ही साथ बड़े पैमाने पर तर्कविहीन, रूढ़ीवादी, अवैज्ञानिक अंधविश्वास जनित कार्यव्यापार के भी मूक दर्शक बने, जैसे कि हमेशा ही ऐसी घटनाओं के समय
 
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सर्वशक्तिमान ईश्वर की झूठी अवधारणा को ध्वस्त करने के लिए खगोलशास्त्र एवं खगोलीय घटनाओं का वैज्ञानिक विष्लेषण आज की महती आवश्यकता है

सहस्त्राब्दि का सबसे लम्बा सूर्यग्रहण सम्पन्न हुआ । एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना के हम प्रत्यक्षदर्शी बने मगर इसके साथ ही साथ बड़े पैमाने पर तर्कविहीन, रूढ़ीवादी, अवैज्ञानिक अंधविश्वास जनित कार्यव्यापार के भी मूक दर्शक बने, जैसे कि हमेशा ही ऐसी घटनाओं के समय
 
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