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शमशेरबहादुर सिंह की जन्मशती पर विशेष- अनकहे सत्य का कवि शमशेर -विजया सिंह

     कला विशेषकर कविता की कला कलाकार को, कवि को नितांत व्यक्तिगत, निजी मानवीय स्थितियों और संवेगों से परिचित कराती है। फिर भी कविता एकालाप नहीं अत्यंत अंतरंग किन्तु सक्रिय संवाद है। शमशेर का निजी उन्हें एकाकी नहीं बनाता। कविता के निजी
 
jagadishwar chaturvedi
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शमशेरबहादुर सिंह की जन्मशती पर विशेष- मौत कोई सेंटीमेंट की चीज नहीं- अरुण माहेश्वरी

(स्व.शमशेरबहादुर सिंह)       जन्म शताब्दी के मौके पर शमशेर बहादुर सिंह का स्मरण आदमी की अंतहीन दबी हुई इच्छाओं के एक पावन खजाने के स्मरण जैसा है। ‘चुका भी हूं मैं नहीं, कहां किया मैंने प्रेम अभी’ की अतृप्ति का रचनाकार, ‘आज निरीह कल
 
jagadishwar chaturvedi