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आज याद आ रहा हैं जुआरियों का एक गीत

1972-73 के आस-पास एक फिल्म रिलीज हुई थी - गुलाम बेगम बादशाहइस फिल्म के मुख्य कलाकार - अनिल धवन, मौसमी चटर्जी और शत्रुघ्न सिन्हा हैं। इस फिल्म के सभी गीत रेडियो के सभी केन्द्रों से खूब सुनवाए जाते थे। आज याद आ रहा हैं मन्नाडे का गाया एक गीत जो शायद
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फिल्म हार जीत का गीत

1972 के आसपास राधा सलूजा की एक फिल्म आई थी - लाखो में एक यह फिल्म बहुत लोकप्रिय रही। इसमे नायक हैं महमूद। इस फिल्म के गीत हम अब भी विविध भारती पर सुनते हैं। इसी फिल्म के आसपास राधा सलूजा की एक और फिल्म रिलीज हुई थी - हार जीत इस फिल्म में दूसरी नायिका हैं
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कॉमेडी फिल्म जौहर महमूद इन हौंग कौंग के कॉमेडी गीत

जौहर महमूद इन गोवा या गोवा फिल्म की सफलता के बाद एक कॉमेडी फिल्म बनाई गई - जौहर महमूद इन हौंग कौंग इस फिल्म के गीत भी बहुत लोकप्रिय हुए थे और रेडियो के सभी केन्द्रों से बहुत सुनवाए जाते थे। आज जो गीत मुझे याद आ रहा हैं उसकी पहली पंक्ति हैं -नथनिया हाले
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न कोई रहा हैं न कोई रहेगा

आज याद आ रहा हैं साठ के दशक की फिल्म का गीत, फिल्म का नाम हैं गोवा या जौहर महमूद इन गोवा जैसा कि नाम से ही लगता हैं इसमे आई एस जौहर और महमूद की मुख्य भूमिका हैं। महमूद इसमे अलग रूप में हैं, क्रांतिकारी की भूमिका हैं। गोवा मुक्ति आन्दोलन पर बनी इस फिल्म
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गीतों की श्रृंखला जारी - अनमोल मोती फिल्म का गीत

धन्यवाद पीयूष जी, रोमेंद्र सागर जी, युनूस जी। इस श्रृंखला को मैं जारी रख रही हूँ। वास्तव में रेडियो से मेरा बचपन का साथ हैं। मैं उस उम्र से रेडियो सुनती हूँ जब गानों के शब्द भी मैं ठीक से पकड़ नही पाती थी। सुनते-सुनते गाने अच्छे लगने लगे फिर शुरू हुआ
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श्रृंखला का अंतिम गीत - फ़ौजी गया जब गाँव में

आज इस श्रृंखला का मैं अंतिम चिट्ठा लिख रही हूँ। आज याद आ रहा हैं सत्तर के दशक की फिल्म आक्रमण का एक गीत। वैसे इस फिल्म के गीत कभी-कभार विविध भारती से सुनवाए जाते हैं पर यह गीत बहुत लम्बे समय से नही सुना। पहले सभी केन्द्रों से बहुत सुनवाया जाता था। इस गीत
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कागज़ की नाव फिल्म के गीत

1976 के आस-पास एक फिल्म रिलीज हुई थी - कागज़ की नावसामाजिक विसंगतियों पर बनी इस फिल्म को लोगो ने बहुत सराहा था। खूब चली थी यह फिल्म, सो इसके गाने भी खूब चले। दो या तीन गाने हैं इसमे। एक गीत अरूणा इरानी पर फिल्माया गया हैं जो मुजरा गीत हैं, उनकी महत्वपूर्ण
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आशा भोंसले और तनुजा का मस्त बंजारा गीत

वर्ष 1972 के आस-पास रिलीज हुई थी एक फिल्म - दो चोर इसमे नायक नायिका है धर्मेन्द्र और तनुजा। यह फिल्म और इसके गीत बहुत लोकप्रिय रहे। विविध भारती समेत रेडियो के सभी केन्द्रों से बहुत सुनवाए जाते थे। आज याद आ रहा हैं आशा भोसले का गाया मस्त गीत जिसे तनुजा पर
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सुलक्षणा पंडित की फिल्म सलाखें के गीत

1977 के आसपास एक फिल्म रिलीज हुई थी - सलाखेंयह सुलक्षणा पंडित अभिनीत अच्छी फिल्म हैं। इसमे नायक जितेन्द्र हैं या संजीव कुमार या इसमे दोनों ही हैं, मुझे ठीक से याद नही। इसके गीत भी शायद सुलक्षणा पंडित ने ही गाए हैं जो विविध भारती सहित रेडियो के सभी
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मेरा जीवन फिल्म का शीर्षक गीत

वर्ष 1976 के आसपास एक फिल्म रिलीज हुई थी - मेरा जीवनबहुत अच्छी उद्येश्यपूर्ण फिल्म थी। दूरदर्शन पर भी यह फिल्म दिखाई गई थी। इस फिल्म में नायक डाक्टर हैं। विद्यार्थी जीवन में ही एक दुर्घटना के शिकार व्यक्ति का आपरेशन करने से उसे निलंबित कर दिया जाता हैं।
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चारमीनार के लोग मुझे कहते मधुबाला

आज याद आ रहा हैं साठ के दशक के अंतिम वर्षो की एक फिल्म का गीत, फिल्म का नाम हैं - वतन से दूरयह बहुत फ्लाप फिल्म हैं, बहुत से शहरों में एक-दो सप्ताह भी नही चली पर यह गीत बहुत लोकप्रिय हुआ था। रेडियो के लगभग सभी केन्द्रों से बहुत सुनवाया जाता था। अब बहुत
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फिल्म संत ज्ञानेश्वर का भक्ति गीत - सुरेश वाडेकर का गाया पहला गीत

आप सबको उगादी, गुडी पडवा, बसंत नवरात्री की शुभकामनाएं !आप सबके लिए नव वर्ष २०६७ मंगलमय हो !आज इस अवसर पर फिल्म संत ज्ञानेश्वर का एक भक्ति गीत याद आ रहा हैं। यह फिल्म साठ के दशक की हैं। इस फिल्म का एक भक्ति गीत बहुत लोकप्रिय हुआ था। रेडियो के हर केंद्र से
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एक नशेड़ियो की क़व्वाली जिस पर सभी झूमे

कभी-कभी ऐसे होता है कि गाने के बोल विवादास्पद होते है पर गाना अपने संगीत और गायकी से बहुत लोकप्रिय हो जाता है। आज ऎसी ही एक क़व्वाली याद आ रही है। फिल्म का नाम है - फाइव राइफल्स - शायद बहुतो ने इस फिल्म के बारे में सुना भी नही होगा।इस फिल्म के नायक है
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पायल की झंकार फिल्म के गीत

पिछले सप्ताह सपना बाबुल का - बिदाई धारावाहिक के नृत्य महोत्सव के एपीसोड देखकर बहुत निराशा हुई। जिस नृत्य संगीत की उम्मीद की जा रही थी वैसा कुछ देखने को नही मिला। इतने फीके एपीसोड देखते हुए याद आई राजश्री प्रोडकशंस की एक फिल्म - पायल की झंकारयह फिल्म 1982
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डैनी का गाया पहला गीत

डैनी डेनजोगप्पा को आपने फिल्मो में चरित्र भूमिकाओं में देखा होगा, शायद बहुत कम लोग जानते होगे कि डैनी गायक है खासकर पहाडी संगीत 1972 के आस-पास रिलीज हुई थी फिल्म - ये गुलिस्ताँ हमाराइसी फिल्म से डैनी ने बतौर गायक फिल्मो में प्रवेश किया था। आशा भोसले के
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प्रेम चोपड़ा का गाया रोमांटिक गीत

पुरानी फिल्मो के दौर में ए वी एम प्रोडक्शंस जाना पहचाना नाम है। पारिवारिक और सामाजिक समस्याओं पर इस बैनर तले बनी फिल्मे बहुत पसंद की गई। मूल रूप से तमिल में बनती थी और बहुत सी भाषाओं में रीमेक होता था। 1972 के आसपास मद्रास (चेन्नेई ) की इस फिल्म कम्पनी
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फ़िल्म कोरा काग़ज़ का रूठे पिया का गीत

सत्तर के दशक के शुरूवाती वर्षों की एक बेहतरीन फ़िल्म है - कोरा काग़ज़इस फ़िल्म का लताजी का गाया एक गीत आज मुझे याद आ रहा है जो पहले रेडियो के लगभग सभी केन्द्रों के फ़रमाइशी और ग़ैर फ़रमाइशी कार्यक्रमों में बहुत सुनवाया जाता था, अब बहुत दिनों से नहीं सुना है।जया
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फ़िल्म हाथ की सफ़ाई से देवदास की हास्य नाटिका का गीत

हाथ की सफ़ाई फ़िल्म के इस गीत के दो संस्करण है। एक किशोर कुमार जी का गाया है इसमें शायद आशा जी की भी आवाज़ है। इसी गीत का दूसरा संस्करण स्टेज नाटिका के रूप में है। यह देवदास का नाटक है पर हास्य रूप में जिसमें रणधीर कपूर और हेमामालिनी की आवाज़ों में संवाद
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फ़िल्म उमर क़ैद का गीत जिसके बोल याद नहीं

उमर क़ैद नाम की एक पुरानी फ़िल्म फ़िल्म है जिसके मुकेश के गाए गीत अक्सर हम भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम में सुनते रहते है। उमर क़ैद नाम की एक फ़िल्म सत्तर के दशक में भी आई थी जिसके नायक है विनोद मेहरा जो शायद पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका में है। शायद फ़रीदा जलाल
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फ़िल्म उस पार का हिंडोला गीत

सत्तर के दशक में एक फ़िल्म रिलीज़ हुई थी - उस पार जिसके मुख्य कलाकार है विनोद मेहरा और मौसमी चटर्जी आज इसी फ़िल्म का एक गीत याद आ रहा है जिसे बहुत दिनों से रेडियो से नहीं सुना है। लताजी के गाए इस गीत के कुछ बोल मुझे याद है - प्यारा हिंडोला मेरा प्यारा ह
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गीत का एक भी बोल याद नहीं

आज एक ऐसा गीत याद आ रहा है जिसका एक भी बोल याद नहीं। फ़िल्म का नाम है - प्यासी नदी जो 1974 के आसपास रिलीज़ हुई थी। इस फ़िल्म के नायक है - विक्रम (जूली फ़ेम) जिनकी शायद यह पहली फ़िल्म है। शायद उनकी ड्राइवर की भूमिका थी। नायिका वाणी गणपति है जो प्रसिद्ध नृत
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बारूद फ़िल्म का गीत

सत्तर के दशक में शायद वर्ष 1976 के आसपास एक फ़िल्म रिलीज हुई थी - बारूद इस फ़िल्म के नायक है ऋषि कपूर और नायिका है शोमा आनंद जिनकी यह पहली फ़िल्म है। यह वही शोमा आनद है जो आजकल धारावाहिकों और फिल्मो में चरित्र भूमिकाओं में नजर आ रही है। यह फ़िल्म बहु
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पहचान फ़िल्म का एक शरारती गीत

सत्तर के दशक के शुरू में एक फ़िल्म रिलीज़ हुई थी - पहचान जो मनोज कुमार की एक लोकप्रिय और हिट फ़िल्म रही। राजकपूर के बाद मनोज कुमार ही एक ऐसे अभिनेता है जिस पर मुकेश की आवाज़ खूब फबी। इस फ़िल्म में नायिका शायद बबिता है। आज इस फ़िल्म के जिस गीत को हम याद कर
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महिलाओं की पारम्परिक भारतीय छवि को दर्शाता गीत

आज महिलाओं की पारम्परिक भारतीय छवि को दर्शाता एक गीत याद आ रहा है जो पहले रेडियो से बहुत सुनवाया जाता था। अब तो एक अर्सा हो गया यह गीत सुने। इस गीत को गाया है लता जी ने, यह एक ही पक्की जानकारी है मेरे पास। फ़िल्म का नाम मुझे न याद आ रहा है और न ही मैं
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फ़िल्म आदमी और इंसान का ज़िन्दगी के रंग बताता गीत

साठ के दशक के अंतिम वर्षों में एक फ़िल्म आई थी आदमी और इंसान जिसे अपार सफलता मिली थी। तब से लेकर आज तक इसके कुछ गीत रेडियो से गूँज रहे है पर एक गीत है जिसे लम्बे समय से नहीं सुना। यह गीत सायरा बानो पर फ़िल्माया गया है पर इस बात की मुझे ठीक से जानकारी न
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फ़िल्म इंतेक़ाम का रफ़ी सा हब का गाया शान्त धीमा गीत

आज याद आ रहा है साठ के दशक की फ़िल्म इंतेक़ाम का एक गीत। इस गीत को संजय और साधना पर फ़िल्माया गया है। रफ़ी साहब का गाया यह बहुत ही शान्त धीमा गीत है और सुनने में बहुत अच्छा लगता है। पहले यह गीत रेडियो से बहुत बजता था। आजकल भी इस फ़िल्म के दूसरे गीत सुनवाए
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आशा भोंसलें की आवाज़ का एक लाजवाब रंग - यार बादेशाह यार दिलरूबा

आज याद आ रहा है साठ के दशक की एक फ़िल्म का गीत। फ़िल्म का नाम है सी आई डी 909 यह फ़िल्म तो इतनी सफल नहीं हुई थी पर इसके गाने बहुत लोकप्रिय हुए थे। रेडियो के सभी केन्द्रों से फ़रमाइशी और ग़ैर फ़रमाइशी कार्यक्रमों में खूब बजा करते थे। अब बहुत समय से सुना नही
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मेरा नाम है सुल्ताना

उषा मंगेशकर ने वैसे भी गीत कम ही गाए है और उनमें भी दो-चार ही लोकप्रिय है। जय संतोषी माँ फ़िल्म के भक्ति गीतों ख़ासकर आरती के अलावा एक ग़ज़ल भी लोकप्रिय हुई जो शायद दीदार-ए-यार फ़िल्म से है और यह एक गीत तराना फ़िल्म से जिसकी चर्चा अब की जा रही है। फ़िल्म तर
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आइए आज याद करे एक मज़ेदार गीत

रेडियो से आजकल मज़ेदार गीत सुनने को ही नही मिल रहे। पहले कम से कम पहली अप्रैल को सुनवाए जाते थे। अब न तो श्रोता फ़रमाइश करते है और न विविध भारती अपने तरफ़ से सुनवाती है। एक ऐसा ही गीत है जिसे सुने बहुत समय हो गया। 1972 के आस-पास रिलीज़ फ़िल्म का जिसका नाम
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एक बरख़ा गीत जिस ने दो कलाकारों से परिचय कराया

बदलते पर्यावरण में वास्तव में हम प्रकृति का आनन्द नहीं ले पा रहे है। पक्षियों का कलरव तो शायद ही अब सुनाई पड़ता है। तो क्यों न गीतों में ही इनका आनन्द ले लिया जाए। आज जिस फ़िल्म के गीत की हम चर्चा कर रहे है वो फ़िल्म वर्ष १९७२ के आसपास रिलीज़ हुई थी। इस
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दिलराज कौर की आवाज़ में सावन गीत

आज जिस फ़िल्म के गीत की चर्चा मैं कर रही हूँ उस फ़िल्म का नाम शायद बहुतों ने सुना भी नहीं होगा। फ़िल्म का नाम है - जान हाज़िर है यह फ़िल्म वर्ष 1977 के आस-पास रिलीज़ हुई थी। फ़िल असफल रही। बहुत ही कम समय के लिए सिनेमाघरों में चल पाई लेकिन यह गीत बहुत लोकप्र
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आगरे का लाला अंग्रेज़ी दुल्हन लाया

दिलीप कुमार की एक लोकप्रिय फ़िल्म है नया दौर जिसमें नायिका है वैजयंती माला जिसका एक गीत बहुत लोकप्रिय है - रेशमी सलवार कुर्ता जाली का रूप सहा नही जाए नख़रे वाली का एक ऐसा ही गीत किस्मत फ़िल्म का है जिसे भी हम बहुत सुनते है। इसमे नायक और नायिका विश्वजी
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रामू दादा फ़िल्म का नाज़ुक सा गीत

देश के कुछ भागों में गर्मी से राहत तो मिली है पर मानसून सिर्फ़ दस्तक ही दे गया। ऐसे में धूप की तेज़ी भी नहीं है और बारिश की झमाझम भी नही यानि मौसम सुहावना सा है। तो क्यों न आज ऐसे ही एक गीत की याद ताज़ा करें। यह गीत भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम में बहुत सुन
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लोकप्रिय गीतों के मुखड़ों की पैरोडी का मिश्रित गीत

अगर हम कहें कि विभिन्न लोकप्रिय गीतों के मुखड़ों की पैरोडी का मिश्रित गीत तो लोग शायद तुरन्त याद करेगें मिस्टर इंडिया फ़िल्म का गीत जो अनिल कपूर, श्रीदेवी और बहुत सारे बच्चों पर फ़िल्माया गया जिसमें सरगम फ़िल्म के गीत के इस मुखड़े - डफ़ली वाले डफ़ली बजा की
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नीला पीला हरा गुलाबी कच्चा पक्का रंग

आप सबको होली की शुभकामनाए ! होली के इस अवसर पर मुझे याद आ रहा है आपबीती फिल्म का एक गीत। यह फिल्म सत्तर के दशक में रिलीज हुई थी. मुख्य कलाकार है हेमामालिनी और शशिकपूर और एक महत्वपूर्ण भूमिका में है प्रेमनाथ. पहले लगभग हर साल होली पर यह गीत रेडियो से
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महिला दिवस पर याद आ रहा है यह गीत

महिला दिवस आ रहा है। यूँ तो महिलाओं के विभिन्न रूपों पर कई फ़िल्मी गीत है जो रेडियो से हम सुनते रहते है पर आज जिस गीत की हम चर्चा कर रहे है वो महिला की वास्तविक स्थिति बताता है ख़ासकर उसकी बरसों पहले की स्थिति। यह गीत शायद औरत फ़िल्म का है जिसमें मुख़्य
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विश्वास फ़िल्म का टूटे दिल का गीत

जब हम बात करते है टूटे दिल के गीत की तो सहज ही एक गायक का नाम दिमाग़ में आता है - मुकेश आज हम याद दिला रहे है विश्वास फ़िल्म का गीत। यह फ़िल्म सत्तर के दशक के शुरूवाती साल या साठ के दशक के अंत में रिलीज़ हुई थी। बहुतों को तो शायद इस फ़िल्म के बारे में पता
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तितली उड़ी

बसन्त का सुहावना मौसम आ गया है। साल भर में यह एक ही ॠतु है जो मनभावन होती है। हालांकि ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से दिन में धूप तेज़ हो जाती है पर अक्सर हल्की धूप और ठंडी-ठंडी हवा के झोकों के साथ झड़ते पत्तों की सरसराहट खुशनुमा होती है। पेड़ों के पत्ते झ
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फ़िल्म आँखिन देखी का अनमोल गीत

पिछले शनिवार विशेष जयमाला कार्यक्रम प्रस्तुत किया था गायिका और अभिनेत्री बहनें सुलक्षणा और विजेता पंडित ने। दोनों ने अपने-अपने गीत भी सुनवाए। यह सब सुनते-सुनते मुझे याद आ गया एक गीत जिसे इस कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता था पर पता नहीं क्यों, नहीं
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हम बच्चे हिन्दुस्तान के है

अस्सी के दशक के शुरूवाती सालों में एक फ़िल्म रिलीज़ हुई थी - हम बच्चे हिन्दुस्तान के। यह फ़िल्म शायद फ़िल्म प्रभाग द्वारा तैयार की गई थी। फ़िल्म तो उतनी लोकप्रिय नहीं हो पाई और जहाँ तक हैदराबाद की बात है मुझे ध्यान नहीं कि यहाँ यह फ़िल्म रिलीज़ भी हुई थी पर