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किधर जाओगे ?

इंसान को इंसान समझो तो कुछ कर जाओगे नहीं तो जब मौत आएगी दरवाजे पर, डर जाओगे दूसरों की राहों में, ऐ कांटे बिछाने वालो कभी उन्हीं पर चलना पड़ा, तो किधर जाओगे? चापलूसों के चढ़ाए, ना चढ़ो चने के पेड़ पर मुगालते में ही बने रहोगे कि, खुद उतर जाओगे उनकी देखकर ख
 
श्रीकांत पाराशर