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भागना

(बचपन के डर और दु:साहस का यह संस्मरणात्मक आलेख पूजा का है)चन्दन की पोस्ट ‘गुमशुदा की तलाश का स्वप्न’ पढ़कर मुझे भी अपना कुछ पिछला याद आ गया। मैं भी एक बार मार खाने के डर से घर से भाग गई थी। अगर मुझे ठीक ठीक याद तो मैं उस समय चौथी में पढ़ती थी और नौ या दस
 
चन्दन
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पूजा की डायरी: अमिताभ बच्चन हमारे ऑफिस में

(विश्व की तमाम भाषाओं की तरह कितनी सारी विधाये भी लुप्त होती जा रही हैं। जैसे डायरी, रिपोर्ताज इत्यादि। हम सब इनके विलुप्त होते जाने पर सच्चे हृदय से चिंतित होते हैं, पर यह भी उतना ही बड़ा सच है कि इस मुश्किल से निकलने के रास्ते हमें नही दिखते। डायरी
 
चन्दन
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भाई, ये महाराष्ट्र कोई और देश है क्या?

(‘नई बात’ पर सबकुछ भले ढंग से चल रहा है पर एक चीज की कमी खल रही थी-वो थी समसामयिकी की। साथियों की तैयारी से अब वो भी कमी दूर किये देते हैं। कोई बड़ा दावा करने की जगह हम यह कहेंगे कि हर हफ्ते किसी खबर को अपने तईं देखने समझने की कोशिश करेंगे। यह भी जरुरी
 
चन्दन