मेरा प्रेम
उसे न कभी देखा,न मिला औरन ही जाना। हां,अपने आसपासउसके होने का अहसासहमेशा रहता है।हवा संग वोकभी शरीर से लिपटती हैतो कभी खुशबू बननथुनों से होकरसीधे हृदय तकजा उतरती है। रोमांचित मनमस्तिष्क में बैठउसकी आकृतियां उकेरने लगता है।और जब इन आकृतियों कोकैनवास पर
Jan 08 2010 11:03 PM



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