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हम कवि और हमारी कविताएं – रवि कुमार

हम कवि और हमारी कविताएं ( a poem by ravi kumar, rawatabhata ) हम सभी संवेदनशील हैं विचारशील भी हमारा सौन्दर्यबोध हर कुरूपता पर हमें द्रवित करता है हमारे पास शब्द हैं और कहने की बाजीगरी भी हम लिख लेते हैं कविता पर हमारी बदनसीबी हमारा समय क्रांतिकारी नहीं
 
रवि कुमार, रावतभाटा
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मूल्य की अभिव्यंजना के दो ध्रुव : सापेक्ष रूप और समतुल्य-रूप

मूल्य के रूप का सार रहस्य इस प्राथमिक रूप में छिपा हुआ है. इसलिए इस रूप का विश्लेषण करना ही हमारी असली कठनाई है. यहाँ दो भिन्न प्रकार के पण्य (हमारी उदाहरण में कपड़ा और कोट), स्पष्ट ही, दो अलग-अलग भूमिकाएँ अदा करते हैं. कपड़ा अपना मूल्य कोट में व्यक्त
 
saathisukhdev
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पण्य के दो कारक : उपयोग मूल्य और मूल्य (मूल्य का सार और मूल्य का परिमाण)

जिन समाजों में उत्पादन की पूंजीवादी प्रणाली व्याप्त है, उनमें धन” पण्यों के विशाल संचय’ १ के रूप में सामने आता है और उसकी इकाई होती है एक पण्य. इसलिए हमारी खोज अवश्य ही पण्य के विश्लेषण से आरंभ होनी चाहिए. पण्य या जिंस के बारे में सबसे पहली बात यह है
 
drvarma68
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मार्क्स की रचना ‘पूंजी’ का सार और पूंजीवाद की चौहद्दी से पार जाने की ज़रुरत

मार्क्स की रचना ‘पूंजी’ से अगर हम कुछ सीखते हैं तो वह होना चाहिए कि पूंजीवाद अपने रुझान द्वारा अपनी ज़रुरत के लिए मेहनतकश ज़मात पैदा करता है जिसे कहते हैं सर्वहारा वर्ग – मेहनतकश जो पूंजीवाद की इन ज़रूरतों को “स्वयं सिद्ध प्राकृतिक नियम” मानता है, क्
 
drvarma68