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चट्टानों से छन कर निकले

चट्टानों से छन कर निकले । तो जल गंगा बनकर निकले । जो थोड़ा सर ख़म कर निकले वे दो अंगुल बढ़कर निकले । तलवारें तिरसूल गलें तो फिर कोई हल ढलकर निकले । कर्मों पर विश्वास नहीं था सो ज्यादा बन-ठन कर निकले । जो जितने ज्यादा ओछे थे वे उतना ही तनकर के निकले । व