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कुंदन जैसी आवाज वाले सहगल

... इस बार पुस्तक चर्चा कर रहे हैं सोलह वर्षीय अबीर जो भोपाल के केन्द्रीय विद्यालय में 12वीं कक्षा के छात्र हैं। इतिहास, भूगोल में बहुत दिलचस्पी रखते हैं। मानचित्र-पर्यटन के शौकीन हैं। पिछले साल भी उन्होंने शब्दों का सफर के लिए पुस्तक समीक्षा की थी। इस
 
अजित वडनेरकर
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पुस्तक-चर्चा एवं लोकार्पण समारोह,इलाहाबाद

Share पुस्तक-चर्चा एवं लोकार्पण समारोह28 अप्रैल 2010अपराह्‌न 5 बजे हिन्दुस्तानी एकेडेमी के तत्वावधान में 28 अप्रैल 2010 दिन बुधवार अपराह्‌न 5:00 बजे एकेडेमी के सभागार में पुस्तक-लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया है। जिसमें एकेडेमी की सद्यः प्रकाशित
 
माणिक
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उपन्यास 'बूढ़ी डायरी'' :सृजन-कथन

Shareचिर सम्मोहिनी छवि: नर्मदा नर्मदा के प्रवाह का ग्राम्य अरण्य प्रेम सदा-सदा ही विश्रुत रहा है। लेकिन मैं तो नर्मदा से पहले-पहल अपने छोटे से नगर होशंगाबाद  में ही मिला था। बचपन की न  जाने कितनी स्मृतियां हैं और स्मृतियों का कोष आज भी कुछ न
 
माणिक
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तेलुगु साहित्य का परिवर्तनशील परिदृश्‍य

तेलुगु साहित्य का परिवर्तनशील परिदृश्‍यनिखिलेश्‍वर (1938) तेलुगु साहित्य के दिगंबर कविता (अकविता) आंदोलन के छह प्रवर्तकों में से एक हैं. वे विप्‍लव रचयितल संघम (क्रांतिकारी लेखक संघ) के सक्रिय संस्थापक के रूप में भी जाने जाते हैं तथा मानवाधिकार संस्थाओं
 
ऋषभ Rishabha
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आत्मलीनता के खिलाफ

आत्मलीनता (आटिज्म) के नाना रूप है। मनोविज्ञान के क्षेत्र में आत्मलीनता एक बड़ी बीमारी है। वास्तविक चिंतन से सर्वथा भिन्न एक ऐसी विचार प्रक्रिया जिसका घटनाओं और वस्तुओं की वास्तविक प्रकृति से कोई संबंध नहीं होता, पूरी तरह से व्यक्ति की अपनी
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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"हिन्दी भारत"

पुस्तक समीक्षा तेलुगु साहित्य का परिवर्तनशील परिदृश्‍यऋषभदेव शर्मानिखिलेश्‍वर (1938) तेलुगु साहित्य के दिगंबर कविता (अकविता) आंदोलन के छह प्रवर्तकों में से एक हैं. वे विप्‍लव रचयितल संघम (क्रांतिकारी लेखक संघ) के सक्रिय संस्थापक के रूप में भी जाने
 
कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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दक्खिनी हिंदी का सूफी साहित्य

दक्खिनी हिंदी के साहित्य सृजन की परंपरा को एक ओर कण्हप्पा, पुफ्फयंत, नामदेव, गोन्दा, एकनाथ और संत तुकाराम से जोड़ा जाता है (डॉ. श्रीराम शर्मा, दक्खिनी का गद्य और पद्य) तो दूसरी ओर इसकी विकास रेखा को दक्कन के मुस्लिम राज्यों के ऐसे कवि- लेखकों के साथ
 
ऋषभ Rishabha
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बहुधाः 9/11 के बाद की दुनिया

बाल्मीकि प्रसाद सिंह की ताज़ा किताब को राजकमल प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। मूल्य है 550 रुपए और 450 पृष्ठ है। पुस्तक की भूमिका दलाई लामा ने लिखी है। वाल्मीकि प्रसाद सिंह व्याख्याता, प्रशासनिक अधिकारी और राजनयिक रह चुके हैं। उनकी छह पुस्तकें प्रकाशित हो
 
अजित वडनेरकर
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डाकिया बीमार है…कबूतर जा…

आज की दुनिया वहां न होती अगर संवाद की इच्छा और उसे पूरा करने की ललक मनुष्य में न रहती। इस हफ्ते एक और खास पस्तक की चर्चा। लेखक- अरविंदकुमार सिंह/ प्रकाशक- नेशनल बुक ट्रस्ट/ पृष्ठ- 406/ मूल्य- 125 रु./ बी ते कुछ हफ्तों से पुस्तक चर्चा नहीं हो पाई। कोश
 
अजित वडनेरकर
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यायावर की यायावरी: एक आडिटर की डायरी

पुस्तक चर्चा यायावर की यायावरी: एक आडिटर की डायरी ऽ कृति : यायावर (उपन्यास) लेखक : डा. मनमोहनसिंह यादव प्रकाषक : पुस्तक मंदिर, प्रथम तल्ला, जुबली नागरी भण्डार परिसर, स्टेषन रोड, बीकानेर (राजस्थान)-334001 संस्करण : 2009 मूल्य : 100 रुपये भाग अ: प्रस्तावना
 
RAVI PUROHIT
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सरपत की धार पर अभय तिवारी

संबंधित आलेख- सरपत के बहाने शब्द-संधान अ भय तिवारी अपने दोस्त हैं। ब्लागर हैं। संवेदनशील हैं और फिल्मों के काम से जुड़े हैं। मुंबई में फिल्मों-धारावाहिकों में अपनी रचनात्मकता के दायरे में आत्मसम्मान की गुंजाईश देखते हुए व्यस्त रहते हैं। इस साल उनकी ब
 
अजित वडनेरकर
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दौरान ए तफ़तीश भाग 3 : बॉस की वहशत, चलते रहो प्यारे और भारत माता के तीन कपूत!

भारतीय पुलिस के आला अधिकारी रह चुके सतीश चंद्र पांडे की किताब दौरान ए तफ़तीश की चर्चा की इस आखिरी कड़ी में कुछ बातें पंजाब पुलिस और सीआरपीएफ से जुड़े लेखक के अनुभवों की। पर इससे पहले गंभीर मसलों पर लेखक के उठाए बिंदुओं का उल्लेख किया जाए, एक ऍसे चरित्र की
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दौरान ए तफ़तीश भाग 2 : रिश्वतखोरी, कुछ ना करने की कला, क़ायदे कानून व कागज़ी आदेशों पर पुलसिया सोच !

दौरान-ए-तफ़तीश पर छिड़ी चर्चा में पिछली पोस्ट में हमने बातें कीं 'काम के समय सख्ती', 'झूठी गवाही', 'थर्ड डिग्री' और कुछ मज़ेदार किस्सों की। आज की चर्चा शुरु करते हैं रिश्वतखोरी की समस्या से जो पुलिस ही क्या सारे भारतीय समाज में संक्रामक रूप से फैल चुकी
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दौरान ए तफ़तीश : भाग 1 - पुलिसिया तंत्र के बारे में लिखा एक पुलिसवाले का ईमानदार संस्मरण

पुलिसिया जिंदगी को कभी नज़दीक से देखने का अवसर नहीं मिला। बचपन में अपने हमउम्रों की तरह चोर सिपाही जैसे खेल खेले। कागज़ के टुकड़ों को अच्छी तरह चौकोर लपेट कर घर के बाकी सदस्यों के साथ राजा मंत्री चोर सिपाही भी बहुत खेला। खेल के दौरान राजा या मंत्री आता तो
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बनारसीदास का अर्धकथानक [पुस्तक चर्चा- 4]

पि छले दिनों एक विशिष्ट पुस्तक हाथ लगी। पेंगुइन बुक्स ने इसे प्रकाशित किया है। बनारसीदासकृत अर्ध-कथानक। यह आत्मकथा है जिसे सन् 1641 में लिखा गया था। इसे हिन्दी की पहली आत्मकथा माना जाता है। आज से करीब पौने चारसौ साल साल पहले हिन्दी साहित्य का पद्यरूप
 
अजित वडनेरकर
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जालियाँवाला बाग त्रासदी की ९० वीं सालगिरह पर झांकिए इस दर्दनाक हादसे को एक पुस्तक की नज़र से...

आज जालियाँवाला बाग त्रासदी की ९० वीं सालगिरह है। इसीलिए सोचा कि इतिहास की परतों में दफ़न इस काले दिन की कहानी कहने वाली इस पुस्तक से रूबरू कराने के लिए ये दिन बिल्कुल उपयुक्त रहेगा। इतिहास और ऐतिहासिक पुस्तकों से मेरा शुरु से लगाव रहा है इसीलिए जब मु
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एक साध्वी की सत्ता कथा [पुस्तक चर्चा]

चा ह कर भी पुस्तक चर्चा नियमित रूप से नहीं हो पा रही है। इस बीच कई पुस्तकें पढ़ी गईं और कई खरीदी गईं मगर शब्द चर्चा के आगे पुस्तक चर्चा के लिए वक्त नहीं निकल पा रहा है । बहरहाल, इस बार बात करते हैं विजय मनोहर तिवारी के चर्चित उपन्यास एक साध्वी की सत्
 
अजित वडनेरकर