पुष्प का अनुराग
विधु से मादक शीतलता लेशोख चांदनी उज्ज्वलता ले,भू से कण कण चेतनता लेअंतर्मन की यौवनता ले .अरुणिम आभा अरुणोदय सेसात रंग ले किरण प्रभा से,रंग चुरा मनभावन उससेप्रीत दिलों में जिससे बरसे .जल बूंदों से निर्मलता लेपवन तरंगों से झूला ले,संगीत अलौकिक नभ से लेमधु
Sep 03 2009 04:18 PM



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