पसंद करें
7
नापसंद करें

इश्क की बात

इश्क की बात हम बताते हैं, एक ताजा गज़ल सुनाते हैं । उनकी यादों से सजाया है इसे , प्यार से लोग गुनगुनाते हैं ॥ नाज़ है गुल को अपने किस्मत पे पहले चूमा गया मुहब्बत से । अदा के साथ उसको जूड़े में हाथ महबूब के लगाते हैं ॥ क्या करें जिक्र हम , शबे ग़म की कैसे
 
अजय कुमार
पसंद करें
7
नापसंद करें

तन्हाई

तन्हा तन्हा सफ़र जिन्दगी का । साथ मुझको मिला न किसी का ॥ उनके दामन से निकली जुदाई । अब भरोसा नही है किसी का ॥ उनके बिन तारे लगते हैं फीके । रंग उतरा सा है चाँदनी का ॥ लोग सजने सँवरने पे घायल । मुझ पे बिजली गिरा सादगी का ॥ चन्द टुकड़ों पे बिकन
 
अजय कुमार
पसंद करें
2
नापसंद करें

उनके लिए

जिंदगी का अब मजा आने लगा है | देखकर उनको नशा छाने लगा है || फिर बहारों से चमन आबाद है , बाग़ में शायद कोई आने लगा है | दूर हूँ , मजबूरियां हैं इसलिए , बेवफा मुझको कहा जाने लगा है | रात भर बाँहों में रहते हैं मेरे , ख्वाब मेरा ये बिखर जाने लगा है | नज़
 
GATHAREE