जब सुनसान हो जाती है पृथ्वी
तुम बची रहोगीउन पुरानीउतार दी गयी कपड़ों की सिलवटों मेंऔर महसूस हो जाओगी अचानकजब किसी दिनयूँ हीं ढूंढ रहा होऊंगा कोई कपड़ाकुछ पोंछने के लिए,ये मैंने सोंचा नहीं थामुझे ये बिलकुल नहीं लगा थाकि इस सतही वक़्त मेंजब प्यार इतना उथला हो गया है,कोई इतने लम्बे
Feb 15 2010 02:19 PM



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