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हरि शर्मा के गीत -

पुनर्प्रस्तुति:हरि शर्मा के गीत            एक- तुम मधु ऋतू मे मिल जाओ प्रिये मैं सपनो का संसार समर्पण कर दूंगा जब मित्र सभी देखा करते उजियारो को मैंने जीवन मे सिर्फ अँधेरा देखा है जब चार दिशा मे गूँज
 
सुशील कुमार