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चलो मिलकर बचाएं पानी-वरना नहीं रहेगी किसी की जिंदगानी

ब्लाग 4 वार्ता  का आगाज करने से पहले सभी ब्लागर मित्रों को राजकुमार ग्वालानी का नमस्कार  आज यह ब्लाग 4 वार्ता की 50वीं चर्चा है। आज चारों तरफ पानी के लिए हाहाकार मचा है। ऐसे में यह जरूरी है कि हम पानी बचाने का जतन करें। अगर हमने अभी से ध्यान
 
राजकुमार ग्वालानी
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कहाँ गईं वो घड़ों-सुराहियों की दूकानें

गर्मी की शुरुवात होते ही घड़ों-सुराहियों की दूकानें दिखनी शुरू हो जाती थीं किन्तु आज इन दूकानों को खोजना पड़ता है। मिट्टी के घड़ों में शीतल किये गये सोंधी और मनभावन गंध लिये हुए पानी का स्वाद ही निराला होता था जो किसी भी प्यासे को तृप्त कर देता था। आज
 
जी.के. अवधिया
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मुंबई में पानी की कालाबाजारी

शिरीष खरे मुंबई/ मुम्बईकरों को पानी की परेशानी के बीच सूचना के अधिकार से एक हैरतअंगेज सूचना निकली है कि बृहन्मुम्बई महानगर पालिका द्वारा कम से कम 18 पानी कंपनियों को उनकी मुनाफाखोरी के लिए लाखों लीटर पानी दिया जा रहा है। एक तरफ जहां शहर के रहवासियों के
 
CRY के दोस्त
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पानी का मतलब

पानी का मतलबदुनिया को मतलब देना हैऔर आदमी को बचाना हैमतलबी होने सेपानी का मतलबएक-तिहाई भू-भाग हैलेकिन घॅंूट भर की प्यास कोसूखने नहीं देना उससे भी बड़ी चुनौती हैपानी का मतलबकविता में तैनात मतलब को छुटटी देना हैपानी का मतलब'ठंडा मतलब कोका कोलाÓ नहींप्यास
 
सुभाष चन्द्र
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प्रियतम तो परदेस बसे हैं, नयन नीर बरसाये रे

नीर अर्थात् सलिल, नीरद, नीरज, जल या पानी! यह नीर कभी नयन से बरसता है तो कभी मेघ से बरसता है। नयन से नीर जहाँ गम में बरसता है वहीं खुशी में भी बरसता है। प्रियतम के विरह में प्रियतमा कहने लगती हैःप्रियतम तो परदेस बसे हैं, नयन नीर बरसाये रेतो दूसरी ओर
 
जी.के. अवधिया
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पानी की नहीं, तलवार की धार

कंगाली में आटा गीला - यह कहावत राजधानी में पानी की स्थिति पर जरूर कही जा सकती थी लेकिन परेशानी यह है कि आटा गीला करने के लिए भी तो पानी चाहिए। अगला विश्वयुद्ध भले ही पानी के लिए हो या न हो लेकिन दिल्ली और हरियाणा के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। इसे दिल्ली
 
दिलबर गोठी
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पानी की नहीं, तलवार की धार

कंगाली में आटा गीला - यह कहावत राजधानी में पानी की स्थिति पर जरूर कही जा सकती थी लेकिन परेशानी यह है कि आटा गीला करने के लिए भी तो पानी चाहिए। अगला विश्वयुद्ध भले ही पानी के लिए हो या न हो लेकिन दिल्ली और हरियाणा के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। इसे दिल्ली
 
दिलबर गोठी
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achcha lagtha hai

पानी पानी रे पानी तेरा नहीं कोई सानी तेरा नहीं कोई रंग पर निराले तेरे ढंग तू जीवन की रस धार तुझमें बसे सारा संसार कभी बूँदें तो कभी बौछारें कभी बरखा तो कभी बाढें तेरे कितने ही नाम पूजे हम तेरे धाम कहीं तू माता तो कहीं सुता कहीं तू पुत्र तो कहीं मित्र
 
Swarna Jyothi
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क्या आपके पास है मंत्रीजी के सवाल का जवाब

अरविन्द शर्मा राजस्थान के जल संसाधन मंत्री महिपालसिंह मदेरणा के सवाल का जवाब क्या आपके पास है? सवाल से पहले राज्य की स्थिति पर गौर फरमा लीजिए। अगर आबादी वर्तमान दर से बढ़ती रही तो वर्ष 2026 तक प्रदेश जल की पूर्णतया कमी वाला प्रदेश बन जाएगा। अंतरराष्ट
 
अरविन्द शर्मा
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बिन पानी सब सून...

पानी की जरूरत किसे नहीं होती है। छत्तीसगढ़ अब तक गर्मी की चपेट में है और यहां कई गांवों में आज भी पानी की मारा-मारी है। एक गांव में काफी दूर से अपने लिए पानी लेकर घर जाती एक महिला की तस्वीर यही बयान कर रही है कि पानी बिन सब सून..
 
राजकुमार ग्वालानी
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