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पहेलियाँ

समय-समय पर इसमें और पहेलियाँ जुड़ती रहेंगी। 1. साथ-साथ मैं चलती हूँ, पर पकड़ नहीं सकते हो तुम। अंधियारा छाते ही देखो, गायब होती मैं गुमसुम। -परछाईं (रचनाकार- रानी पात्रिक)
 
रानी पात्रिक