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पहेलियाँ
समय-समय पर इसमें और पहेलियाँ जुड़ती रहेंगी। 1. साथ-साथ मैं चलती हूँ, पर पकड़ नहीं सकते हो तुम। अंधियारा छाते ही देखो, गायब होती मैं गुमसुम। -परछाईं (रचनाकार- रानी पात्रिक)
Dec 29 2009 11:56 AM



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