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गांधी और मैं -रोहित पाण्डेय

जबसे होश सम्हाला है...गांधी की चर्चा सुनी है तो गांधी सबके हैं, सबके भीतर...पर क्या वाकई सबके भीतर हैं...? तो सबसे पहले मैंने खुद को टटोला..और जो पाया वो लिखा था "गांधी और मै" शीर्षक से..अब बारी है श्री रोहित पाण्डेय जी की. बेबाकी से लिखा इन्होंने, ज
 
सदाग्रह शांति सद्भावना के लिए...