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कुछ अपनी कुछ पराई--२

पहचान की तलाश की बात पिछली पोस्ट में हुई थी. आज भी उस पर कुछ लिखना  चाहती हूँ. भारत में हम माँ-बाप, खानदान, दादा, परदादा और एक भरे पूरे परिवार से जाने जाते हैं. एक पहचान ले कर पैदा होते हैं. वहाँ  पहचान की तलाश की तलब नहीं
 
Shabdsudha