कुछ अपनी कुछ पराई--२
पहचान की तलाश की बात पिछली पोस्ट में हुई थी. आज भी उस पर कुछ लिखना चाहती हूँ. भारत में हम माँ-बाप, खानदान, दादा, परदादा और एक भरे पूरे परिवार से जाने जाते हैं. एक पहचान ले कर पैदा होते हैं. वहाँ पहचान की तलाश की तलब नहीं
Sep 20 2009 12:40 AM



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