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छोटकी बेमार बा बाकी सब ठीक हौ (भोजपुरी)

मत करा तूं जियरा हलकान अम्मा काहें एतना हो गइलू परेशान अम्मा छोटकी बेमार बा बाकी सब ठीक हौ घर में दरार बा बाकी सब ठीक हौ अबकी छुट्टी मिली त आइब जरूर हम देत बाई तोहके जबान अम्मा मत करा तूं जियरा हलकान अम्मा काहें एतना हो गइलू परेशान अम्मा . भोरहरी में उठे
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’सेल्समैन ऑफ़ दि ईयर’ के जयगान के बीच संशय का एकालाप

प्यारे बार्नस्टीन, तुम जानते तो हो कि इस मुल्क़ में गुलामी दरअसल कभी ख़्त्म ही नहीं हुई थी. उसे बस एक दूसरा नाम दे दिया गया था. मुलाज़िमत.” –’द असैसिनेशन ऑफ़ रिचर्ड निक्सन’ से उद्धृत. एक तसवीर जिसमें बैठे लोग वापस लौट जाते हैं. एक लैटर बॉ
 
मिहिर
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अंजान

अंजान है रास्ता , अंजना है सफर , अनजाने लोग , अंजान है हमसफर ,फिर भी निकल पड़ा हु | आगे पहचाना रास्ता मिला , मंजिल मिला , पहचाने लोग मिले , हमसफर मिला , पर मेरी पहचान न मिली ...........
 
Dhiraj Shah
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पहचान

थोडा अपना सा कुछ बेगाना साकुछ पहचाना सा कुछ अन्जाना साथोडा भोला सा कुछ दिवाना साकुछ ऐसा है हम सफर मेराइक अजनबी , जाना - पहचाना सा ।
 
धीरज शाह
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एक छोटे शहर की लड़की (१)

एक छोटे शहर की लड़की आँखों में हज़ारों सपने लिए आती है महानगर में, अकेली लड़ती है अपने अस्तित्व को मिटने से बचाने के लिए, एक पहचान हो उसकी भी बस इतना चाहती है, और इसके लिए रोज़ एक नया गुर सीखती जाती है।
 
mukti
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आधी दुनिया का कच्चा-’चिट्ठा’

तात्कालिक आग्रह पर लिखा गया समसामयिक चर्चा से रचा आलेख. अप्रकाशित रह जाने की वजह से अपने चिट्ठे पर लगा रहा हूँ. महिला दिवस पर कहीं गहरे बनस्थली को याद करते हुए जहाँ आज भी मुझे मेरा पीछे छूटा हुआ माइक्रोकॉस्म दीखता है. ********** “मैं दरवाज़ा थी,