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सोचो सोचो सोचो

सब चीजों को धूप सुखाये लेकिन हमें भिगोती हम तो हरदम भीगे रहते छाया जो न होती चलो खुजाओ सभी खोपड़ी है कैसी ये माया इस बात को वही बताए जिसको पसीना आया
 
पवन *चंदन*