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पल दो पल की शायरी...

जो बीत गई वो बात गईसूरज निकला और रात गईअब जीने की ख्वाहिश क्या करनामरने की तमन्ना कौन करेजब प्यास बुझाने की खातिरप्यासा पनघट को जाता हैऐसे में प्यासा क्यों मरनाऔर... पानी-पानी कौन करे!...