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पर्यावरण संरक्षण हमारा कर्तव्य ही नहीं, धर्म भी है

हमारा पर्यावरण का उद्देश्य धरती पर हो रहे पर्यावरण के क्षरण के प्रति जागरुकता लाना है। इस ब्लाग पर हम प्रयावरण सबंधी लेखों का प्रकाशन करेंगे तथा उन्हे स्थान देंगे। पर्यावरण के प्रदूषण से वातावरण में निरंतर बदलाव हो रहा है। गर्मी, सर्दी, वर्षा आदि ॠतुओं
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खतरा है खतरा ।

आबादी से उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड से  दुनिया को खतरा है| इसे निम्नलिखित कड़ी में देखा जा सकता है| http://breathingearth.net/
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मौत के घाट उतार दिए जाएंगे 40 हजार से ज्यादा वृक्ष

एक तरफ जहां पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रदूषण को कम करने में सक्षम वृक्षों की धुआँधार कटाई भी जारी है। एक सूचना के मुताबिक, गंगनहर एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए चालीस हजार से ज्यादा हरे-भरे वृक्षों को एकमुश्त मौत के घाट उतार दिया
 
पवन कुमार अरविन्द
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धरती पर पैर धरो धीरे

(वसंत ऋतु में) “जरा धीरे चलो मेरे भाई, धरती मैया पेट से है” – उत्तर अमेरिकी आदिवासी उक्ति अपने लोक जीवन और पारंपरिक ज्ञान से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं. पृथ्वी माता के प्रति सम्मान की अनेक कथाएं भारतीय मानस में जीवित हैं. हजारों सालों तक
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एक आंदोलन जो विश्वव्यापी मुहिम बन गया

'चिपको आंदोलन ’ के 36 साल पूरे होने पर विशेषविनोद के मुसानएक आंदोलन, जिसने विश्वव्यापी पटल पर धूम मचाई। पर्वतीय लोगों की मंशा और इच्छाशक्ति का आयाम बना। विश्व के लोगों ने अनुसरण किया, लेकिन अपने ही लोगों ने भुला दिया। एक क्रांतिकारी घटना, जिसकी याद में
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सामूहिक स्नान (व्यंग्य/कार्टून)

<=गर्मी के मौसम में पानी बचाने का इससे माकूल तरीका दूसरा नहीं हो सकता । सामूहिक स्नान से पानी भी बचता है और आपस में प्रेम भी बढ़ता है । Filed under: हिन्दी हास्य व्यंग्य Tagged: कार्टून, गर्मी, पर्यावरण, पानी बचाने, सामूहिक, स्नान, हिन्दी हास्य
 
K M Mishra
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अब पौधों से बनेगा मिंट्टी में खपने वाला प्लास्टिक

सैन फ्रांस्सिको। प्लास्टिक अब औद्योगिक कचरा नहीं रहेगा। हाल ही में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि धरती के पर्यावरण के अनुकूल पौधों से प्लास्टिक बनाने में उन्होंने कामयाबी हासिल कर ली है। यानी अब नए किस्म का प्लास्टिक मिट्टी में आसानी से गल जाएगा और
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दारू सुलभ, आलू सस्ती । खींचो पापड़ संग विस्की । (हास्य/व्यंग्य: होली)

-बुरा न मानो होली है, हिक्क ! पड़ोसी के आंगन में खड़ा दशहरी खड़े-खड़े बौरा रहा है । बसंत आ रहा [...]
 
K M Mishra
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होली का मर्म

अपने आप को धर्म और भगवान से ऊँचा मानने वाला हिरण्यकश्यप नाम का एक राजा था। वह चाहता था कि सब लोग उसे ही भगवान मानें और उसकी पूजा करें । पर हिरण्यकश्यप के पुत्र ने उसे भगवान मानने से साफ इनकार कर दिया । बहुत यातना व अत्याचार के बाद भी [...]
 
अफ़लातून
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ऐसी पाबंदी भला किस काम की

प्लास्टिक के दुष्प्रभावों को देखते हुए कई राज्य सरकारों ने पालीबेग के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी है लेकिन कई उद्योग इसके स्थान पर अपने उत्पादों के लिए प्लास्टिक पाउच का इस्तेमाल करने लगे हैें. जिससे समस्या खत्म होने के स्थान पर गंभीर होती जा रही है।
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गिद्धों की वापसी.....

एक बहुत अच्छी खबर जो किसी भी पर्यावरण प्रेमी को खुश होने का एक मौका दे गयी पर शायद जानकारी के आभाव में आम नागरिक इस बात से अछूता ही रह गया है. उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर फिर से लुप्त प्राय गिद्धों के परिवारों को देखा गया है. निश्चित तौर पर प्रकृति
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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पुराणातली बीटी वांगी(BT Brinjal)

अखेरीस भारताच्या पर्यावरण मंत्र्यांनी बीटी वांगी परत पुराणातच ठेवा. त्यांना बाहेर काढू नका. बाजारात तर अजिबातच नको. असा आदेश काढला. लोकशाहीत कोणत्याही गोष्टीचा कसा पद्धतशीर विचका करता येतो याचा बीटी वांगी हा आदर्श नमुना ठरावा. आज ही बातमी वाचल्यावर, मला
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SAVE OUR TIGERS....

The tiger is the most powerful living cat species on the earth and the largest and heaviest living of the cats in the world. Physical traits of the tiger vary according to subspecies, but generally male tigers can weigh between 400 and 700 lb and females
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सैकड़ों वर्ष पहले के इंजीनियर ही बेहतर थे

यह चिट्ठी सालों पुराने पानी संचय करने के तरीके को बता रही है। यह आज भी प्रसांगिक है। yeh chitthi puraane paani sanchay karne ke treeke ko bataa rahee hai. yeh aaj bhee prasangik hai. This post talks about old method of harvesting water that is still
 
उन्मुक्त
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जलवायु परिवर्तन की समस्या – रोचक एवं चिंतनीय तथ्य विज्ञान पत्रिका ‘साइंटिफिक अमेरिकन’ से

दिसंबर 17 की पोस्ट में मैंने वैश्विक जलवायु परिवर्तन के संबंध में संपन्न कोपनहेगन बैठक का जिक्र करते हुए अपनी कुछ टिप्पणियां प्रस्तुत की थीं । उसके बाद दिनांक 23-12-2009 की पोस्ट में उस मुद्दे से घनिष्ठ रूप से जुड़े अमेरिका-प्रेरित आधुनिक जीवन शैली का
 
योगेन्द्र जोशी
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इतिहास की भयावह त्रासदी का शिकार हुआ हेती

उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप के कैरेबियाई क्षेत्र के एक छोटे से देश हेती की राजधानी पोर्ट ऑफ प्रिंस गत 13 जनवरी की शाम 4 बजकर 53 मिनट पर उस समय प्रकृति की महाविनाश लीला का एक बहुत बड़ा केंद्र बन गई जबकि इस क्षेत्र को 7.3 क्षमता के भयानक भूकंप का सामना करना
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मेरी ६०० वीं पोस्‍ट: आज का विषय पर्यावरण

स्वास्थ्य की कीमत पर धनोपार्जन, कितना उचित?डॉ. महेश परिमलएक उद्योगपति की पत्नी बीमार हो गई। हर जगह उसका इलाज करवाया, पर कोई फायदा नहीं हुआ। उद्योगपति पत्नी को खूब चाहता था, पत्नी भी उसे खूब चाहती थी। अंतत: डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। स्थिति यह आ गई कि
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बिगड़ते पर्यावरण से बढ़ेगा पलायन

इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन ने अनुमान लगाया है कि 2050 तक तकरीबन 20 करोड़ लोगों का पलायन जलवायु परिवर्तन की वजह से होगा। वहीं कुछ संगठनों का मानना है कि 2050 तक यह संख्या 70 करोड़ होगी। मालूम हो कि 2050 तक दुनिया की आबादी बढ़कर नौ अरब तक पहुंच जाने
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आगरा का भूमिगत जल पीने लायक नहीं

देश के सर्वाधिक जल प्रदूषित चार शहरों में आगरा भी शामिल है। ताजनगरी का भूमिगत जल पीने योय नहीं है। यह चिंताजनक स्तर तक हानिकारक रसायन युक्त तथा कई बीमारियों को दावत देने वाला है। शहर की अव्यवस्थित सीवरेज प्रणाली व उद्योगों से निकलने वाले रसायनिक प्रव
 
सन्‍मय प्रकाश
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कीटनाशकयुक्‍त गेंहू खाकर आठ मोर मरे

पछता रहे हैं फतेहपुर सीकरी के ग्रामीण कीटनाशकों के प्रयोग का दुष्‍प्रभाव आम जीवन में हम शायद ही महसूस कर पाते हैं। लेकिन फतेहपुर सीकरी के कराही गांववासी अब पछता रहे हैं। दरअसल, यहां के खेतों में बोए गए कीटनाशकयुक्‍त गेहूं, मोरों का काल बन गया। 21 नवम
 
सन्‍मय प्रकाश
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पानी की लड़ाई में पिस रहे प्रवासी परिंदे

केवलादेव नेशनल पार्क में सूखा .. कीठम में पानी जरूरत से ज्‍यादा.. पानी की लड़ाई में प्रवासी परिंदे पिस रहे हैं। भरतपुर के केवलादेव नेशनल पार्क में सूखा पड़ गया है। राजस्‍थान के करौली में पांचना डैम बनने के बाद यह समस्‍या आई है। दूसरी ओर आगरा के कीठम
 
सन्‍मय प्रकाश
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मौसम के उतार-चढ़ाव से परिंदे भी हैरान

ठंड से लौटी कीठम पक्षी विहार में चहचहाहट - सन् ‍मय प्रकाश ...... मौसम के उतार चढ़ाव ने मनुष्‍यों ही नहीं, प्रवासी पक्षी को भी हैरान कर दिया है। उड़ान भर चुके चालीस हजार पक्षियों ने सफर स्‍थगित कर वापस आगरा के कीठम पक्षी विहार में डेरा डाल लिया। एक बा
 
सन्‍मय प्रकाश
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रामसेतु तोड़ने सम्बन्धी पर्यावरणीय दृष्टि2

कोलकाता से प्रकाशित दैनिक समाचारपत्र 'सन्मार्ग' दिनांक 19 सितम्बर,2007 के पृष्ठ-3 पर रामेश्वरम् से श्रीलंका तक के रामसेतु के तोड़ने से उपजनेवाले पर्यावरण सम्बन्धी नुकसान और कुछ और प्रकाश डाला गया है।ओड़िशा के केन्द्रापड़ा में विश्व प्रसिद्ध "ओलिव रिड
 
हरिराम
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पेड़ लगाना भी अपराध है?

पेड़ लगाना भी अपराध है?Planting a tree is also a crime?आश्चर्य की बात है कि भारत में पेड़ काटना नहीं, बल्कि एक पेड़ लगाना अपराध है।भारतीय दण्ड विधान की धारा के अन्तर्गत भले ही पेड़ काटने को गम्भीर अपराध माना जाता है, फिर भी गरीब आम जनता ही नहीं, सरका
 
हरिराम
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गिद्ध फिर से गायब हो गये

3 जनवरी 2009. यही वो दिन था जब हमने कहा कि ‘गिद्ध लौट आये है’. ठीक एक साल बाद हम एक दूसरी बात कह रहे है. लौट कर आने वाले गिद्ध वापस चले गये है. गिद्धों की प्रजाति के लुप्त होने के पीछे पशुओं को दी जाने वाली दवा एक कारण मानी जाती है लेकिन गिद्धों की
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प्लास्टिक कचरे का बढ़ता खतरा

महानगरीय जीवन की विभीषिकाओं की चर्चा हो तो प्रदूषण का नंबर पहला होगा। देश के हर शहर की हालत एक सी है, हवा में फैला धुंध धुआं, शोर, नालों में तब्दील होती नदियां, प्लास्टिक थैलों और पाउचों से पटे कूड़ेदान और जलती आंखें, बढ़ती बीमारियों  से
 
आशीष वशिष्ठ
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लगता है कि साइकिल चलाने का चस्का बढ़ेगा

इस चिट्ठी में कोपेनहेगन व्हील के बारे में सूचना है। is chitthi mein Copenhagen wheel ke baare mein soochnaa hai. This post gives information about Copenhagen wheel.
 
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लगता है कि साइकिल चलाने का चस्का बढ़ेगा

इस चिट्ठी में कोपेनहेगन व्हील के बारे में सूचना है। is chitthi mein Copenhagen wheel ke baare mein soochnaa hai. This post gives information about Copenhagen wheel.
 
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मोर मर रहे हैं

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मोर बहुतायत में पाये जाते हैं लेकिन अब राष्ट्रीय पक्षी मोर पर संकट है. एक साथ 40 मोर के मरने की खबर से इलाके के वन विभाग अधिकारी और प्रशासनिक तबका दोनों ही सकते में आ गये हैं.
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कोपेनहेगन में क्या हुआ?...कुछ खास नहीं!

भले ही विकासशील देशों और कई पश्चिमी देशों की मांग के विपरीत इसमें कार्बन उत्सर्जन घटाने की किसी विस्तृत समय-सारिणी की व्यवस्था नहीं है इसकी बदौलत कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन का समापन उस किस्म की नाकामी में नहीं हुआ जिसकी आशंका थी। वहां से लौटते नेताओं के
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रामजी के खेत से रामजी की चिड़िया

कुछ एक दिन पहले मुझे इन्दौर के श्री संजय रामेश्वर पांचालजी का ईमेल प्राप्त हुआ. साथ में राजस्थान पत्रिका में छपे समाचार भी संलग्न था. उन्होने लिखा था, “पिछ्ले दिनों मेरे परिवार के सामने कुछ पक्षियों की मौतें बिजली विभाग की लापरवाही से हो रही है
 
संजय बेंगाणी
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बाघ बचे भी तो कैसे?

नेपाल की राजधानी काठमांडू में अक्टूबर को अंतिम सप्ताह में विश्व बैंक और नेपाल सरकार के सहयोग से ग्लोबल टाइगर वर्कशाप में यह आधार बनाया गया कि ”शेर बचाना हमारी परीक्षा है” और यदि हम इसमें सफल हुए तो हम इस धरती को बचाने में सक्षम होंगे।
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केवलादेव की राष्ट्रीय पहचान पर संकट मडराया

राजस्थान की यूँ तो अपनी पहचान है. मगर उस पहचान के साथ भरतपुर के केवलादेव पक्षी विहार के जुड जाने से से उसमें वृद्वि ही होती है . प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जिले भरतपुर में पक्षियों का स्वर्ग कहा जाने वाला पक्षी विहार है. इसे फिलहाल विश्व प्राकृतिक धर
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कोप15 से कोई होप नहीं

कोपेनेहेगेन जलवायु वार्ता जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे आशा-उम्मीदों के दिये कमजोर पड़ते जा रहे हैं। धरती गरम होती जा रही है, दुनिया के सैकड़ों द्वीप डूबने के कगार पर हैं, भारत के सुंदरवन के ही चार से ज्यादा द्वीप डूब चुके हैं, ऐसे में भी विकसि
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कोपनहेगन का कड़वा सच

कोपेनहेगन सम्मेलन में विकासशील और विकसित देशों का अपनी-अपनी मांगों को लेकर अड़ियल रवैया अपनाना ही है। उनके इसी रवैए के कारण नवंबर में प्रस्तावित बार्सिलोना सम्मेलन खटाई में पड़ गया है। इस सम्मेलन के खटाई में पड़ने का एक प्रमुख कारण दक्षिण अफ्रीकी देशों
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नक़वी का नगमा

प्रिय अविनाशजी, नमस्कार. नुक्कङ पर लिखने का मोह बना है. हिन्दीब्लाग्स पर नजीम नकवी ने पर्यावरण मुद्दे पर सुन्दर आलेख लिखा है, उसी पर मेरी यह ट्तिपणी, आप भी देखें. मुझे बतायें कि मुझे आगे किस प्रकार लिखना चाहिये. वेब साईट वाले के साथ सही सम्बन्ध बनने
 
Ummed Singh Baid "Saadhak "
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पर्यावरण बचाने के नाम पर हो-हल्ला ही ज्यादा

पर्यावरण संरक्षण वर्तमान में चर्चा का सबसे प्रिय विषय है। पर्यावरण प्रदूषण व संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, कचरा प्रबन्धन व वृक्षारोपण ‘फैशन‘ का हिस्सा है। हाई प्रोफाइल पार्टियो, मीटिंगों से लेकर कालेज, यूनिवर्सिटी में पर्यावरण की चर्चा करना ‘स्टेटस सिम्बल‘
 
आशीष वशिष्ठ
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कोपेनहेगन के कोपभाजन का शिकार कौन होगा?

कोपेनहेगन में दुनियाभर के लगभग सभी देश इकट्ठा हो रहे हैं. हमारे अखबार हमें बता रहे हैं कि कोपेनहेगन में कुछ देशों को कोपभाजन का शिकार होना पड़ सकता है. अखबारों की सदिच्छा और इच्छा अपनी जगह लेकिन कोपेनहेगन में वे देश शेष देशों के कोपभाजन बनेंगे जिन्हे
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जहरीली होती नदियां

जहरीली होती नदियांपर्यावरण प्रदूषण आज पूरे विशव  के समक्ष सबसे बड़ी समस्या बन कर उभरा है। परमाणु खतरे से भी बड़ा व भयानक खतरा पर्यावरण प्रदूषण का है। जल, वायु, पृथ्वी सभी बड़ी तेजी से प्रदूषण की चपेट में आ रहे हैं। प्रदूषण की सबसे बड़ी मार हमारे जल
 
आशीष वशिष्ठ