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गुरुओं से भी सावधान होना पड़ेगा क्या ?

मेरे देश में एक प्रचलन बहुत तेजी से फैल रहा है,  गुरु बनाने का.  हर किसी ने किसी न किसी आश्रम या कहना चाहिए आलीशान आश्रम में रह रहे गुरु को अपना मार्गदर्शक बना रखा है.  इन गुरुदेवों का नेटवर्क बहुत अच्छा होता है,  और इनका
 
राम त्यागी
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इस तरह की चर्चायें कन्या भ्रुण हत्यायें रोकना कठिन बना सकती हैं-हिन्दी लेख (public disscution and kanya bhrun hataya)

अगर कुछ ब्लाग लेखकों के पाठ की बातों पर यकीन किया जाये तो फिर उस पत्रकार युवती की हत्या/आत्महत्या का मामला न रहकर अनेक विषयों पर बहस का रह गया है। हमारे देश में कथित रूप से विकासवादी तथा मनुष्यवादी बुद्धिजीवियों का प्रचार माध्यमों, विश्वविद्यालयों के साथ
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पिता और मेरे सपने

सारी दुनिया ,लेखक कवि वृन्दसब गाते है माँ की महिमामै भी नतमस्तक हूँदेवी प्रतिमा के आगेकहीं चुभता मन में एक शूलपिता की अनदेखी करहो न मुझसे कोई भूलपिता जो मेरे घर की धुरीमाँ के हाथों की चूड़ी हैंरोज़ शाम उनकी राह तकती हूँआकर मुझे सुलाते हैपर उनकी आँखों में
 
शब्द-निधि
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हमारा तन्त्र जल्द से जल्द ईमानदार कैसे बन सकता है? Think .

आदरणीय जनाब सतीश सक्सेना जी ! आपके लिए सलामती और शांति की कामना करता हूं । सोचा था कि आज आपसे कुछ और बातें करूंगा लेकिन छत्तीसगढ़ के दांतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले में मारे गये जवानों की लाशें देखकर ख़याल का रूख़ दूसरी ही तरफ़ मुड़ गया । इतने बड़े और ऐतिहासिक
 
DR. ANWER JAMAL
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रिश्ते

चारो तरफ विवाह की चहल पहल। लोग खुशियाँ मन रहे हैं। मिठाइयाँ बंट रही हैं। बधाइयों के दौर चल रहे हैं।विदाई का वक्त हो गया। कुछ लोगों में चर्चा हो रही है।"अब तो लड़की रोएगी।""क्यों रोएगी भला? पड़ोस के शहर में ही तो जा रही है। कभी फुदक के इधर, कभी फुदक के
 
स्पाईसीकार्टून
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कल्पना - नए जहाँ की !

आओ रचें  एक विश्व ऐसा, एक लक्ष्य से जुड़ें सभी, व्योम के विस्तार सा,संसृति के विचार सा संयमित एक आचार सासंतुलित व्यवहार सा,हो विश्व एक परिवार सा.यत्न करें  संग-संग चलें,संयुक्त ही सब प्रयत्न हों,धीर धर के निपट लेंयक्ष प्रश्नों से सभी,उत्तर
 
रेखा श्रीवास्तव
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भुलाना उन्हें सम्भव ही नहीं, फिर से मिल पाना जिनसे मुमकिन ही नहीं......!!!!!

पाँच वर्ष का समय बहुत ज्यादा पुराना नहीं होता कुछ भुलाने के लिए। और कुछ ऐसा होता है जिसे चाह कर भी भुलाया जाना सम्भव नहीं होता है। आज की ही तारीख थी, सन् 2005 की सुबह, फोन की घंटी घनघनाई और फिर शुरू हुआ आशंकाओं, चिन्ताओं का दौर। जो पास नहीं था, उसकी
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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डर आत्मा से खुरचता ही नहीं :

अलार्म रोज बजता है, चौंक कर आंखें खुलती है, पसीने से भींगें जिस्म के साथ मैं सबसे पहले टटोलता हूं जल को हाथ जब तक उसको छूता है तब तक आंखें भी देख लेती है उसको मुस्कुराकट के साथ सोए हुयेकई बार मिल जाती है बीबी भी बगल में लेटी हुयीऔर कई बार खाली दिखता है
 
mediajantantra
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ग्रीटिंग कार्ड के इस टुकड़े में में ऐसा क्या ख़ास था .........

कल जब यूँ ही पढने के लिए बुक सेल्फ से एक किताब निकाली तो उसके बीच से एक पुराने ग्रीटिंग कार्ड का एक हिस्सा निकाल आया ...याद आया ..ये ग्रीटिंग कार्ड का फटा तुडा मुड़ा सा टुकड़ा तीन चार साल पहले बेटी को उसके कोचिंग सेंटर के बाहर पड़ा मिला था ....अपनी कोमल
 
वाणी गीत
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आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति

आजकल चैनलों पर एक मुद्दा प्रमुखता से छाया हुआ है... और वो है किशोरों और युवाओं द्वारा की जा रही आत्महत्या का... एक समाचार चैनल ने इस पर स्पेशल प्रोग्राम दिखाया... और मनोवैज्ञानिक को भी बुलाया.... बार-बार बस एक ही बात निकल कर आ रही थी या सबलोग बस एक ही
 
प्रज्ञा
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अर्थी तो उठी...२

अर्थी तो उठी...२Posted by shama at 2:48 PMआगेका भाग लिखने जा रही हूँ....'नुक्कड़' लोग पे वाणी जी ने कहा, आत्महत्या पर्याय नही। हमें पहले ये जान लेना होगा कि, वजूहात कैसे और कौनसे रहे। आत्महत्या करने वाले व्यक्ती मे अक्सर 'serotonin मात्रा कम पाई जाती
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अर्थी तो उठी...१

अर्थी तो उठी...Posted by shama at 6:09 PMचंद वाक़यात लिखने जा रही हूँ...जो नारी जीवन के एक दुःख भरे पहलू से ताल्लुक़ रखते हैं....ख़ास कर पिछली पीढी के, भारतीय नारी जीवन से रु-ब-रु करा सकते हैं....हमारे मुल्क में ये प्रथा तो हैही,कि, ब्याह के बाद लडकी अपने
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बचपन से ही किस्मत ने छोड़ दिया साथ

कहा जाता है कि मां बच्चे की पहली गुरु होती है, लेकिन ऐसे लाखों बच्चे होते हैं जिन्हें मां तो क्या बाप की परछाई भी नसीब नहीं होता। असुरक्षा की वजह से ऐसे लोग कुछ ऐसे फैसले ले लेते हैं, जो उनकी जिंदगी को तहस-नहस कर देते हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी किरन ब
 
किरन बेदी
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यह सास-बहू का इंडिया है प्यारे

टीवी बदल रहा है। यह वाक्य शायद सही नहीं है। होना चाहिए, हम बदल रहे हैं। लेकिन सच तो यह है कि टीवी हमें बदल रहा है। इसकी मिसाल आपके सामने है, जिसकी तरफ अभी तक किसी ने गौर नहीं किया। सैटलाइट टीवी ने जब दूरदर्शन की जगह ली तो जल्द ही उसकी पहचान बने वे सी
 
संजय खाती
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नए ज़माने की बहू

एक मॉडर्न सास ने बहुत उदारता दिखाते हुए अपनी बहू से कहा , मैं तुम्हारी मित्र हूं। बहू ने समझाया , लेकिन मुझे आपकी मित्रता नहीं चाहिए। आप अपनी उम्र के लोगों से मित्रता कीजिए। यह कोई चुटकुला नहीं है। यह सास - बहू के बदल रहे रिश्ते की एक तस्वीर है। भारत
 
बालमुकुंद
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नए ज़माने की बहू

एक मॉडर्न सास ने बहुत उदारता दिखाते हुए अपनी बहू से कहा , मैं तुम्हारी मित्र हूं। बहू ने समझाया , लेकिन मुझे आपकी मित्रता नहीं चाहिए। आप अपनी उम्र के लोगों से मित्रता कीजिए। यह कोई चुटकुला नहीं है। यह सास - बहू के बदल रहे रिश्ते की एक तस्वीर है। भारत
 
बालमुकुंद
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जैसा समाज होगा वैसा परिवार

पिछले वर्षों में कुछ नयी-पुरानी अवधारणाओं और नैतिकताओं पर विचार करता रहा हूं। फलस्‍वरूप छोटे-छोटे लेख/टिप्‍पणियां संभव हुईं। उनमें से विचारार्थ कुछ यहां दे रहा हूं। उस क्रम में यह पहला लेख। जैसा समाज होगा वैसा परिवार पूँजीवादी समाज में परिवार का स्वर
 
कुमार अम्‍बुज
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मरे हुए बच्चों की मुस्कान... और जय जिहाद!

यूनिवर्सिटी की उस पहाड़ी पर शाम के धुंधलके में सिगरेट का धुंआ कसैलापन पैदा नहीं कर रहा था। बीयर के कैन का टिन कभी उठते-खिसकते स्किन से छू जाता , तो बदन चिहुंक जाता , मगर जाने का मन नहीं करता। छह दिन कुढ़ने , जलने और कटने के बाद यह संडे आया था और इसे
 
सौरभ द्विवेदी
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बिखरे सितारे १३) सितारों से आगे.....!

पूजाकी ज़िंदगी पे उड़ एक चली गोली के दूरगामी असर हुए: अब आगे पढ़ें।) जिस बच्चे को गोली लगी उसका क्या हुआ? उसे जाँघ पे गोली लगी। दादा जी ने निशाने बाज़ी में सिखा रखा था,वो काम आ गया...वरना लड़का जानसे जाता... पूजाके दादा जी ने उसे सही वक़्त पे अस्पताल प
 
kshama
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बिखरे सितारे ! १२) एक अनजाना मोड़ !

इसके पहली किश्त में पूजा की मंगनी की बात बताई थी...अब आगे..) पूजा ने अपनी मंगनी करवाके बचपना किया...जैसे समय बीतता रहा..उसे अपनी गलती महसूस हो रही थी...जो लड़का उस पे जान निछावर करता था,उसकी इज्ज़त तो करती,लेकिन प्यार या कोई आकर्षण ने दिलके द्वारों प
 
kshama
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घरों के भीतर भी घरों का बनना

इस धनतेरस पर अपनी अम्मा जी के लिए नया टी0वी0 हम भाइयों ने खरीदा। हमारे कमरे में और हमारे छोटे भाई के कमरे में अपना-अपना टी0वी0 है। अम्मा जी अपने मनपसंद कार्यक्रम अपनी दोनों बहुओं के साथ बैठ कर देख लेतीं। सुबह के समय को छोड़ कर अन्य किसी समय में कार्यक
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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बेनामी संपत्ति क्या है? संपत्ति के बेनामी हस्तांतरण पर रोक किस तरह की है?

मुंबई की वर्षा झा के प्रश्न के उत्तर में लिखी गई तीसरा खंबा की चिट्ठी पिताजी ने अपनी अर्जित आय से संपत्ति माँ के नाम खरीदी थी। संपत्ति का बंटवारा कैसे होगा? पर राज भाटिया जी ने टिप्पणी की थी ... दिनेश जी आप की बात समझ में नहीं आई आज, अगर कोई आदमी अपन
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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परिवार और संस्कार…

बचपन के सच बचपन की तरह कितने कोमल और सहज होते हैं । कभी चांद को आंगन में उतार लाने की हठ का सच! कभी आंगन में फुदकती गौरैया को पकड़ने की अजानी कोशिश का सच और कभी झाड़ू की सींक से बनाए गुड़िया के स्वेटर बुनने का सच! याद आती है वो पुराने स्वेटरों की उधड़ी [...]
 
satyanshu
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बोले तू कौनसी बोली ? ७

कुछ अरसा हुआ इस बात को...पूरानें मित्र परिवार के घर भोजन के लिए गए थे। उनके यहाँ पोहोंचते ही हमारा परिचय, वहाँ, पहले से ही मौजूद एक जोड़े से कराया गया। उसमे जो पती महोदय थे, मुझ से बोले, "पहचाना मुझे?" मै: "माफ़ी चाहती हूँ...लेकिन नही पहचाना...! क्या ह
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मेरे कुछ सवाल...जवाब कौन देगा?

मेरा पालन-पोषण बचपन से ही लड़कों की तरह हुआ था. मैं अपने भाई से सिर्फ़ एक साल बड़ी हूँ. मेरे घर में हम दोनों के लिये एक जैसी चीज़ें आती थीं. मुझे कभी नहीं लगा कि मैं उससे किसी भी मामले में अलग हूँ. पढ़ने-लिखने में उससे ज़्यादा तेज थी, इसलिये मेरे पिताजी म
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परिवार पर टीवी का वार

आरूषि की मौत का सवाल किससे है। क्या उस बाप से जिसके ऊपर उसकी जान लेने का आरोप है। या उस मां से जिसकी खामोश मौजूदगी में ये सब हुआ। या उस समाज से जिसके नक्शेकदम को एक पन्द्रह साल की बच्ची एक नाजायज जाल में फंसी थी। वो बहकी थी, या बहकाई गई थी, या वो पिस
 
Soochak
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एक मनोगत......

अपने असंपादित कडीकी माफ़ी चाहती हूँ....spellings चेक नही कर पायी....और अगली कडीमे वादा है कि...उन चंद घटनायों का ब्योरा ज़रूर दूँगी...जानती हूँ, इस मालिका पढ़नेवाले हर अज़ीज़ पाठक को चंद घटनायों का इंतज़ार है... चाहकर भी मै अधिक तेज़ीसे नही लिख पा रही हू
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वो अकेली नहीं है

जिस अपार्टमेन्ट में मैं रहता हूँ उसका गार्ड आज बदल गया. वास्तव में उसने अपने पेशा बदल लिया. वह अपार्टमेन्ट के गार्ड रूम में अपनी पत्नी और ७ साल की एक बेटी के साथ रहता था. मेरा बेटा भी तकरीबन ५ साल का है कुछ और भी बच्चे हैं जो सभी लगभग ७ साल से [...]
 
कौतुक [Kaotuka]