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प्रेम से ही अस्तित्व है

   हम सभी शायद प्रेम को परिभाषित करने की नाकाम कोशिशे करते आये है, वैसे तो में भी एक निर्दोष सी कोशिश कर रहा हूँ पर कारन सिर्फ यही है की में खोज में हूँ और जो अब तक पता लगा है वो ये है की प्रेम एक ऐसा अनुभव है जो की खोजी को ही प्राप्त हो
 
रूपम
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हम परमात्मा को गाली देते हैं!!!

परमात्मा यानी सर्व आत्माओं में परम | जिनको हम कहते है की ये हर जगह और हर जीव में विद्यमान है ! सूअर कुत्ते बिल्ली गाय गधे में सब जगह मौजूद है ! एक दुष्ट आदमी में और एक क्रूर आदमी में भी परमात्मा मौजूद है ! दरअसल ये कहना परमात्मा को सबसे बड़ी गाली देना है