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खुशबू की जीत मगर बदबू से लड़ाई जारी है

शाबाश खुशबू! नहीं, बधाई नहीं। तुम अभी जीती नहीं हो। सुप्रीम कोर्ट ने तुम्हारे खिलाफ चल रहे 22 मामले खारिज कर दिए हैं। लेकिन यकीन मानो यह जीत नहीं है। इससे कुछ नहीं बदलेगा। वे लोग जो तुम्हें जलती निगाहों से देखते आए हैं, देखते रहेंगे। वे, जो हाथों में
 
विवेक आसरी
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बोल-चाल की हिन्दी में कविता

महावीर प्रसाद द्विवेदी (1864-1938) कुछ लोगों का खयाल है कि बोल-चाल की हिन्दी में कविता का जन्म हुए अभी बीस ही पच्चीस वर्ष हुए। पर खोज से इस भाषा की कविता के ऐसे कई नमूने मिले हैं जो बहुत पुराने हैं। यदि इस तरह की कविता का जन्म पच्चीस ही तीस वर्ष पहले हुआ
 
रंगनाथ सिंह
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क्या यह लेखिकाओं के साथ पक्षपात है ?

प्रेमचंदएक युवक लेखक ने अपनी एक कृति किसी पत्र-सम्पादक के पास छपने को भेजी। सम्पादक ने उसे लौटा दिया। लेखक ने दूसरे सम्पादक के पास भेजी। उसने भी उसे लौटा दिया। तब लेखक ने दूसरे सम्पादक के पास भेजी। उसने भी उसे लौटा दिया। तब लेखक को एक चाल सूझी। उसने लेख
 
रंगनाथ सिंह
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निबन्ध क्या है ?

रामचन्द्र शुक्ल (1884-1941)यदि गद्य कवियों या लेखकों की कसौटी है तो निबन्ध गद्य की कसौटी है भाषा की पूर्ण शक्ति का विकास निबन्धों में ही सबसे अधिक सम्भव होता है। इसीलिए गद्यशैली के विवेचक उदाहरणों के लिए अधिकतर निबन्ध ही चुना करते हैं। निबन्ध या
 
रंगनाथ सिंह
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मौलिकता का मूल्य

महावीर प्रसाद द्विवेदी (1864-1938)कुछ समय से , हिन्दी -साहित्य में, मौलिक रचना का महत्व खूब गाया जा रहा है। ऐसी रचनाओं की कमी ही नहीं,प्रायः अभाव ही सा बताया जा रहा है कि सामर्थ्य रखने वाल लेखकों को मौलिक ही पुस्तकों की रचना करनी चाहिए। इस पर प्रश्न हो
 
रंगनाथ सिंह
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आज 21 जून फादर्स डे – जून का तृतीय रविवार

आज ‘फादर्स डे’ (Fathers’ day) है । मदर्स डे की भांति यह भी पश्चिम से अपने देश में आयातित एक और पर्व-दिवस है, और उसी की तरह हालिया डेड़-दो दशकों में देश के मध्यम तथा उच्च वर्गीय शहरी नवयुवाओं में लोकप्रिय हो चला है । इसे क्यों और कैसे मनाया जाए ज
 
योगेन्द्र